पारंपरिक फसलों के साथ किसानों को नकदी फसलों की ओर प्रोत्साहित करने के लिए उद्यान विभाग स्ट्राबेरी की खेती को बढ़ावा दे रहा है। जिले में आगामी जायद सीजन के लिए करीब 17 हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्ट्रॉबेरी की खेती कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए किसानों को 40 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।
गेहूं, धान और अन्य पारंपरिक फसलों के साथ नई फसलो को बढ़ावाय दिया जा रहा है।
पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण भी स्ट्राबेरी की बाजार में अलग पहचान है। इसमें विटामिन सी, विटामिन ई और विटामिन ए के साथ कई अन्य पोषक तत्व हैं। इसके चलते फल की मांग उपभोक्ताओं के बीच बनी रहती है।
उद्यान विभाग के अनुसार, मुख्य राज्य औद्यानिक मिशन योजना के तहत 10 हेक्टेयर और मुख्यमंत्री योजना के तहत सात हेक्टेयर में खेती कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन दोनों योजनाओं के तहत कुल 17 हेक्टेयर का लक्ष्य है। करीब 12 हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्ट्रॉबेरी की खेती कराई जा रही है।
पारंपरिक फसलों के साथ किसानों को नकदी फसल का विकल्प देने के लिए स्ट्रॉबेरी की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। जायद के सीजन में जिले में 17 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इसकी खेती कराने का लक्ष्य मिला है। इसके लिए किसानों को अनुदान भी दिया जा रहा है।- प्रज्ञा उपाध्याय, जिला उद्यान अधिकारी

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

