मंडलीय चिकित्सालय के कैंसर रोग विशेषज्ञ डा. शशि भूषण उपाध्याय ने बताया कि टेक्सटाइल डाई और औद्योगिक रसायनों का लंबे समय तक प्रयोग करने से शरीर में जहर घोलता है। ये पदार्थ धीरे-धीरे लीवर और किडनी को नुकसान पहुंचाते हैं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं।

मरीज के तीमारदारों का दर्द

जौनपुर के गौराबादशाहपुर निवासी मरीज के तीमारदार रामप्रकाश सिंह ने बताया कि बाहर की मिठाई समेत अन्य खानपान की वजह से मेरी सासू मां कैंसर की चपेट में आ गई है, अब इलाज इतना महंगा है कि काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह राजातालाब के सुरेश ने बताया कि त्योहारों पर बाहर की मिठाई समेत बाहर से खानपान अधिक होने की वजह से घर में मेरी मां की किडनी खराब हो गई है।

यह खाद्य पादर्थ में रंग मिलना पूर्ण रूप से है प्रतिबंधित

खाद्य सुरक्षा अधिकारी कौशलेंद्र शर्मा ने बताया कि पिसी हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर, आटा, सूजी, ब्रेड, सूखे मेवे, शिशु आहार, शहद, गुड़ और खाद्य तेल जैसे कई पदार्थों में रंग मिलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। फिर भी बाजार में चमकदार मिठाइयां बेची जा रही हैं। उन्होंने दुकानदारों से अपील की है कि शुद्ध सामग्री का ही इस्तेमाल करें, अन्यथा कड़ी कार्रवाई होगी।

उपभोक्ताओं के लिए यह चेतावनी है कि असामान्य चमक या गहरा रंग देखकर आकर्षित न हों। पैकेट पर लिखी सामग्री और तारीख जरूर जांचें। संदेह होने पर विभाग को तुरंत सूचना दें। त्योहार के नाम पर परिवारों को मीठा जहर खिलाया जा रहा है। प्रशासन का अभियान जारी है, लेकिन जब तक उपभोक्ता खुद सतर्क नहीं होंगे, यह खतरा कम नहीं होगा। स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।