बिहार MLC चुनाव में निर्दलीय चुनाव जीतने वाले वंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज की सदस्यता खतरे में पड़ गई है। उनकी भाजपा में ज्वानिंग का जहां जदयू ने विरोध किया है, वहीं मामला कानूनी पचड़े में फंसता दिखाई दे रहा है।
मामले में फंसता देख बीजेपी ने भी यूटर्न ले लिया है। पार्टी का कहना है कि ये दोनों पार्टी में शामिल नहीं हुए हैं। केवल भाजपा का समर्थन किया है। कानून के मुताबिक निर्दलीय सदस्य किसी भी पार्टी का समर्थन कर सकते हैं। पार्टी ने दोनों नेताओं को भाजपा में शामिल करने वाली सोशल मीडिया पोस्ट भी हटा ली है।
जदयू नेताओं ने जताई नाराजगी
सारण शिक्षक क्षेत्र से निर्वाचित राहुत राज चुनाव से पहले भाजपा की प्रदेश कार्य समिति के सदस्य थे, लेकिन सीट जदयू के खाते में गई तो उन्हें टिकट नहीं मिल सकी। इसके बाद भी उन्होंने नामांकन कर दिया, जिसके कारण उन्हें दल से छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया गया, लेकिन 27 अक्टूबर को जैसे ही परिणाम आया और उसके चौथे दिन उन्हें भाजपा में शामिल कर लिया गया।
वहीं, तिरहुत स्नातक क्षेत्र से निर्दलीय निर्वाचित वंशीधर ब्रजवासी दूसरी बार निर्दलीय जीते और शिक्षकों-युवाओं के कल्याण के नाम पर भाजपा में शामिल हो गए।
इन दोनों नेताओं ने जदयू प्रत्याशियों को हराया है। इस वजह से उनकी भाजपा में ज्वाइनिंग का जदयू ने भी विरोध किया है। तीन दिन पहले अभिषेक ने अपने फेसबुक पर लिखा था कि एनडीए नेताओं के चक्रव्यूह के कारण उनकी हार हुई। उनके पक्ष में आए 4700 मतों को रद कर दिया गया।
चौतरफा घेराव देखकर बीजेपी भी बैकफुट पर है और कह रही है कि उसने दोनों नेताओं को पार्टी में शामिल नहीं किया है, बल्कि वंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज ने उनकी पार्टी की समर्थन किया है।
बीजेपी कुछ भी दावा करे, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए आई तस्वीरों ने विपक्ष को बड़ा हथियार दे दिया है। इन तस्वीरों में दोनों नेता पार्टी की सदस्यता पर्ची दिखाते हुए पाए गए हैं। अब देखना होगा कि सभापति इसमें क्या फैसला लेते हैं और विपक्ष क्या कदम उठाता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

