पूर्वांचल के खिलाड़ियों को दूसरे राज्यों में प्रशिक्षण के लिए नहीं लगानी पड़ेगी दौड़, मिलेंगे आधुनिक संसाधन

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पूर्वांचल की खेल प्रतिभाओं को अब बेहतर प्रशिक्षण और अभ्यास के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय परिसर स्थित एकलव्य स्टेडियम को आधुनिक खेल सुविधाओं से सुसज्जित करने की तैयारी है।

इससे विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ ही जौनपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के युवा खिलाड़ियों को भी अपने क्षेत्र में बेहतर खेल संसाधन, प्रशिक्षण और अभ्यास की सुविधा मिल सकेगी। स्टेडियम का विकास होने से स्थानीय प्रतिभाओं को निखरने और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए खुद को तैयार करने का अवसर मिलेगा।

इस दिशा में कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने पहल करते हुए खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव से मुलाकात की है। इस दौरान एकलव्य स्टेडियम के विकास और खेल सुविधाओं के विस्तार से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। विश्वविद्यालय प्रशासन की मंशा है कि स्टेडियम को इस तरह विकसित किया जाए, जिससे विभिन्न खेलों के खिलाड़ियों को अभ्यास के साथ व्यवस्थित प्रशिक्षण की सुविधा भी मिल सके।

स्टेडियम में क्रिकेट, फुटबाल, हॉकी, वालीबाल, बास्केटबाल, बैडमिंटन और एथलेटिक्स समेत विभिन्न खेलों के लिए जरूरी आधारभूत ढांचा और आधुनिक संसाधन विकसित करने पर जोर रहेगा। खिलाड़ियों की तकनीक, फिटनेस, खेल कौशल और प्रदर्शन में सुधार के लिए विशेषज्ञ प्रशिक्षकों (कोच) की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण होगी। इससे ग्रामीण अंचलों में छिपी खेल प्रतिभाओं को भी नियमित प्रशिक्षण मिल सकेगा।

अभी संसाधनों और प्रशिक्षकों की कमी के कारण कई खिलाड़ियों को बेहतर अवसरों की तलाश में दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है।वर्तमान में बेहतर खेल सुविधाओं और उच्चस्तरीय प्रशिक्षण के लिए पूर्वांचल के खिलाड़ियों को लखनऊ, दिल्ली, बिहार, बंगाल, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र सहित दूसरे स्थानों पर जाना पड़ता है। बाहर की खेल अकादमियों में प्रशिक्षण लेने के लिए खिलाड़ियों को अकेडमी फीस के रूप में न्यूनतम 20 हजार रुपये प्रतिमाह तक खर्च करना पड़ता है।

इसके अलावा आने-जाने, रहने और खानपान का खर्च जोड़ने पर यह राशि करीब 25 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंच जाती है। ऐसे में एकलव्य स्टेडियम में आधुनिक संसाधन और प्रशिक्षक उपलब्ध होने से खिलाड़ियों को आर्थिक राहत मिलेगी। उनका समय और पैसा बचेगा तथा वे नियमित अभ्यास पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।करीब दो महीने पहले कुलपति का कार्यभार संभालने वाले प्रो. राकेश कुमार सिंह का मानना है कि विश्वविद्यालय में शिक्षा के साथ खेल गतिविधियों को भी समान महत्व मिलना चाहिए।

खेल विद्यार्थियों में अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और शारीरिक दक्षता विकसित करने का माध्यम हैं। एकलव्य स्टेडियम का विकास होने से विश्वविद्यालय परिसर खेल प्रशिक्षण और प्रतिभा संवर्धन के केंद्र के रूप में विकसित हो सकेगा। इससे न केवल विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, बल्कि आसपास के ग्रामीण युवाओं को भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।

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