वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को रमा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन साधना और व्रत करने से दोनों की कृपा एक साथ प्राप्त होती है और घर में स्थायी धन-संपदा, सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य का वास होता है। साथ ही सभी संकट दूर हो जाते हैं।
कई बार गृहस्थ और वैष्णव संप्रदाय के एकादशी व्रत की तारीखें अलग-अलग हो जाती हैं। इसलिए लोगों में असमंजस की स्थिति बनी रहती है कि आखिर किस दिन व्रत करना चाहिए, तो चलिए जानते हैं कि गृहस्थ और वैष्णव संप्रदाय वाले रमा एकादशी का व्रत कब रखें?
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 04 नवंबर को सुबह 11 बजकर 03 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 05 नवंबर को सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, रमा एकादशी का व्रत 05 नवंबर को किया जाएगा। इस वर्ष गृहस्थ और वैष्णव दोनों संप्रदायों के लिए रमा एकादशी का व्रत एक ही दिन यानी 5 नवंबर को ही मान्य होगा।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04 बजकर 57 मिनट से 05 बजकर 49 मिनट तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02 बजकर 06 मिनट से 02 बजकर 51 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 05 बजकर 49 मिनट से 06 बजकर 15 मिनट तक
निशिता मुहूर्त: रात्रि 11 बजकर 49 मिनट से 12 बजकर 41 मिनट तक
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है। 06 नवंबर को व्रत का पारण करने का समय सुबह 06 बजकर 41 मिनट से 08 बजकर 54 मिनट तक है। इस दिन व्रत का पारण करने से पहले अन्न, धन और कपड़े समेत अन्य चीजों का दान किसी मंदिर में या जरूरतमंद लोगों को दें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन चीजों का दान करने से एकादशी का व्रत सफल होता है और पूर्ण फल की प्राप्ति होती है।
‘रमा’ माता लक्ष्मी का ही एक नाम है। इस एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ-साथ मां लक्ष्मी की भी विशेष रूप से पूजा की जाती है, जिससे दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से मनुष्य द्वारा जाने-अनजाने में किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मन शुद्ध हो जाता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

