इंस्टाग्राम और एक सरकारी योजना ने बदली जिंदगी: गांव की इन 5 महिलाओं ने कैसे खड़ा किया करोड़ों का बिजनेस?

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कुछ चाहना या ठान लेना ही काफी नहीं। इसके लिए चाहिए एक सपना, उसे पूरा करने का संकल्प व अवसर भी। केंद्र सरकार की लखपति दीदी योजना भी एक ऐसा ही अवसर है जिसकी मदद से ग्रामीण महिलाओं ने न केवल अपनी जिंदगी बदली, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई दी है।

हाल ही में विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश में आयोजित राष्ट्रीय सरस मेला 2026 में भाग लेने वाली लखपति दीदियों से बताया वो मंत्र जिसकी मदद से वे चल पड़ी हैं लखपति से करोड़पति दीदी बनने के सफर पर।

चंद्रकला, तिरुपति, आंध्र प्रदेश, सालाना टर्नओवर एक करोड़, बीस लाख

13 साल की चंद्रकला का विवाह संयुक्त परिवार में हुआ। वह घर के सारे काम में निपुण थीं। हालांकि, उनका मन विद्रोही था, यह उनके 20 वर्षीय पति को पता चल गया था। वह लकड़ी पर भगवान तिरुमाला को ऐसे उभार देतीं कि उनकी कलाकृति देखकर सभी चकित रह जाते।

किसी ने उनसे कहा कि तुममें इतना हुनर है कि तुम खूब कमाई कर सकती हो। चंद्रकला ने यह सुनते ही जैसे ठान लिया कि अब नहीं रुकना। उनके भीतर जैसे आकांक्षाओं के पंख उगने लगे। पति की मौन सहमति के कारण राह भी मिल गई। उन्होंने एक स्वयं सहायता समूह में प्रवेश लिया।

कर्ज लिए व लकड़ी पर एनामेल पेंटिंग व नक्काशी वाली कलाकृति का व्यवसाय शुरू किया। उनकी अनवरत चलते जाने की यह यात्रा बस एक ही बार रुकी। वर्ष 2017 में जब उनके पति का देहांत हो गया, पर आज उनके दोनों बच्चे एमबीए करके मां के व्यवसाय को आगे बढ़ा रहे हैं।

यहां हम चंद्रकला की तरह उन ग्रामीण महिलाओं की बात कर रहे हैं, जो शुरुआती दिनों में अभावों में पली-बढ़ीं, पर जब अवसर मिले तो जैसे उनकी अंदरूनी शक्ति व कौशल साकार हो उठा। आज वे एक मंझे हुए व्यवसायी की तरह अपने व्यवसाय आगे बढ़ा रही हैं साथ ही असंख्य ग्रामीण महिलाओं की रोल माडल बनकर उभर रही हैं।

लक्ष्य बड़ा रखना व समय के हिसाब से बदलाव करना मेरी सफलता का राज है। देश के लगभग सभी राज्यों में प्रदर्शनी कर चुकी हूं। इससे लाखों कमाए, पर इससे अधिक बिजनेस के गुर सीखे। राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार सभी को अपनी कलाकृतियां उपहार में दी हैं और सराहना पाई है।

आगामी दिनों में मेरा लक्ष्य है कि जो पढ़े-लिखे बेरोजगार हैं उन्हें काम दूं और जो जरूरतमंद महिलाएं हैं उन्हें प्रशिक्षित कर उन्हें भी इस ओर प्रेरित करूं

कुंवारी बरवा, गुमला, झारखंड, सालाना टर्नओवर अस्सी लाख

मिटटी का घर था। पति किसानी करते थे। गरीबी में तीन बच्चों को कैसे बड़ा करें? हमेशा इस चिंता से घिरी रहती थीं। फिर एक स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और पीछे मुड़कर नहीं देखा। मेरे पास कोई हुनर नहीं था।

हां, बस किसानी करना जानती थी। पहले 15 हजार का कर्ज मिला तो गाय खरीदी। इसके बाद सिंचाई के लिए मशीनरी खरीदी। हम समूह में बचत करके एक-दूसरे को मदद करते थे। इससे बच्चों की पढ़ाई में भी मदद मिली।

2014 में मैंने पक्का घर भी बना लिया। खेती से मिलने वाली आय से बिटिया नर्सिंग में पढ़ने लगी, लेकिन जब उसकी फीस भरने में और उसकी कुछ मांग पूरी करने में परेशानी आती तो मुझे मजबूरी रुला देती, पर हर कदम पर खुद को मजबूत किया और अब मेरे तीनों बच्चे अच्छा पढ़ लिख गए हैं।

इन दिनों हम मोटे अनाज को बाजार में कैसे उतारना है उस पर काम कर रहे हैं, जैसे रागी का केवल रोटी नहीं, बल्कि इसका उपयोग अन्य प्रोडक्ट निर्माण में किस तरह से किया जाए, इस पर शोध कर रहे हैं। जब आप अच्छा करते हैं तो सबका सहयोग मिलता है

मैं सात माह की थी। मां का देहांत हो गया। पिता ने दूसरी शादी की, पर मेरा बचपन चाचा के घर में बीता। मुझे अच्छे कपड़े पहनने का शौक था। स्कूली पढ़ाई भी बड़ी मुश्किल से हुई। कालेज हो या फैशन डिजाइनिंग का कोर्स, सबकी फीस मैंने खुद अपनी कमाई यानी ट्यूशन से भरी।

मैं सामान्य फैशन डिजाइनर की तरह नहीं बनना चाहती थी। ऐसे कपड़े बनाने शुरू किए, जो फ्यूजन हों और परंपरागत व आधुनिक सभी लोग पसंद करें। जब मुझे पता चला कि सरकार से बिजनेस बढ़ाने के लिए कर्ज मिल सकता है तो मैंने झट इसके लिए आवेदन किए और इस राह पर आगे चल पड़ी।

अब मेरी शादी हो चुकी है। शादी के बाद मेरे हाथ और मजबूत हुए हैं। सासूजी का साथ मिला और मैंने हाल ही में उनकी प्रेरणा से एक और साड़ी ब्रांड लांच किया है। हालांकि, मैं अकेले चलने की आदी रही हूं और यह कब मेरी सफलता का मंत्र बन गया पता नहीं चला। सहज लगता है सफलता की कहानी पढ़ना-सुनना, पर जिंदगी कभी सीधी रेखा में कहां चलती है। हमेशा सकारात्मक पक्ष देखें तो राह आसान हो सकती है

पीछे मुड़कर देखती हूं तो किसी फिल्म की तरह लगती है अपनी जिंदगी। दूसरी ग्रामीण महिलाओं की तरह ही काम से फुर्सत पाते ही हम कढ़ाई-बुनाई का काम करते थे। पति ड्राइवर थे। किसी तरह गुजारा चल रहा था। एक दिन इंस्टाग्राम पर देखा कि लोग अपना प्रोडक्ट बेचते हैं।

पता चला कि एक-एक सूट 20-20 हजार में बिक जाता है। फिर यूं ही एक दिन अपना एक सूट आर्डर के लिए डाल दिया। जब तीन हजार के आर्डर मिल गए तो मैं खुशी के मारे उछल पड़ी, लेकिन बाद में आर्डर कैंसिल भी हो गए। उससे दुख तो हुआ, पर हिम्मत नहीं हारी। जो कमियां थीं दूर करने लगी।

सरस मेला व अन्य प्रदर्शनियों में भाग लेना शुरू किया। पहली बार सेल एक लाख की और तीसरी बार तो 10 लाख से ऊपर की। आज पति के साथ मिलकर परिवार ही नहीं, बल्कि आसपास की महिलाओं की जीविका चलाने में हम मदद कर रहे हैं।

शून्य से ही कोई शुरुआत होती है उसके बाद आप पर है कि आप उसे कितना आगे ले जा सकते हैं। बिजनेस में सफल होने के लिए जरूरी है कि आप असफलताओं को दिल पर लेना छोड़ दें।

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