शहरों में ज्वाइंट फैमिली की जगह न्यूक्लियर फैमिली का चलन बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अब वर्किंग कपल के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि अपने बच्चे की देखभाल कैसे की जाए। इसके लिए उनके सामने एक आसान विकल्प बचता है बेबी सिटर।
बच्चे के लिए बेबीसिटर जल्दी-जल्दी में कभी न ढूंढे, क्योंकि आपका हड़बड़ी में लिया गया फैसला बच्चे के भविष्य पर भारी पड़ सकता है। हमेशा व्यक्ति के बर्ताव, काम करने के तरीके और मुश्किल परिस्थतियों में चीजों का सामना करने जैसी बातों को मिलकर सामने से परखें
आप घर पर सिर्फ नैनी नहीं ला रहे, बल्कि बच्चे के साथ इमोशनल बॉन्ड बनाने वाले व्यक्ति को अपने परिवार में जोड़ रहे हैं। इसके लिए सबसे पहली शर्त है कि बैकग्राउंड वेरिफिकेशन। आईडी प्रूफ, पिछले पते और पुलिस वेरिफिकेशन के बाद ही फैसला लेने की सोचें।
कैंडिडेट के सामने से मिलने और अपने अनुभव साझा करने के बाद पैरेंट्स की यह जिम्मेदारी बनती है कि उसके पिछले दो मालिकों से जांच पड़ताल की जाए। इस पूछताछ में उनसे पिछली नौकरी छोड़ने, लापरवाही और अनुशासन में रहने जैसे सवाल करें।
कई बार ज्वाइनिंग के बाद ऐसी स्थिति आती है कि जब नैनी से सुनने को मिलता है कि यह काम मुझे नहीं कहा गया था। इससे बचने के लिए जरूरी हो जाता है कि आप उनकी जिम्मेदारियों की एक पूरी पहले से बना दें। यह तरीका आपको नैनी के काम में आनाकानी करने और अपनी बात पर न रहने जैसी बातों से बचाएगा।
अगर आपको लगता है सारी बातों की अच्छे से पड़ताल करने के बाद काम खत्म हो गया है, तो ऐसा नहीं है। आपको बेबीसिटर को काम रखने के बाद एक महीने तक उसे एक ट्रायल की तरह देखना है। बच्चे के साथ उसके बर्ताव से लेकर काम करने के तरीके तक, सभी बातों को इस दौरान सही से समझना-परखना है, ताकि आप यह ते कर पाएं कि वह वाकई में आपकी उम्मीदों पर खरी उतरी है या नहीं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

