त्योहारों के सीजन में बाजार में मिठाइयों और पकवानों की मांग काफी तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे में इस रौनक के बीत मिलावटखोर भी काफी एक्टिव हो जाते हैं और मिलावटी घी धड़ल्ले से बेचना शुरू कर देते हैं। हाल ही में सूरत में 900 किलो नकली घी पकड़ा गया है।
त्योहारों के सीजन में मार्केट में घी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में डिमांड और सप्लाई में आए अंतर का फायदा उठाकर मुनाफाखोर घी में वेजिटेबल ऑयल, स्टार्च, उबले हुए आलू, शकरकंद और सड़ा हुआ एनिमल फैट मिलाकर बेचते हैं। ऐसा मिलावटी घी खाने से लिवर, डाइजेशन और हार्ट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
- थेली पर टेस्ट- शुद्ध घी की सबसे बड़ी पहचान है कि ये हाथ पर आते ही पिघलने लगता है। घी टेस्ट करने के लिए अपनी हथेली पर एक चम्मच घी रखें। अगर वो तुरंत पिघलने लगे और हथेली पर चिकनाहट के साथ खुशबू छोड़े, तो मतलब घी असली है। लेकिन अगर घी हथेली पर रखने पर पिघल नहीं रहा है या काफी देर से पिघल रहा है, तो यानी घी में मिलावट की गई है।
- पिघले का तरीका और रंग- एक पैन में थोड़ा घी डालकर गर्म करें। असली घी बहुत जल्दी पिघल जाता है और उसका रंग हल्का सुनहरा या गहरा पीला हो जाता है। वहीं नकली या मिलावटी घी पिघलने में समय लेता है और उसका रंग सफेद या धुंधला सा रहता है।
- हाइड्रोक्लोरिक एसिड टेस्ट- ये घी में वेजिटेबल ऑयल टेस्ट करने का सबसे बेहतरीन तरीका है। एक कांच की साफ टेस्ट ट्यूब में एक चम्मच पिघला हुआ घी लें और इसमें बराबर मात्रा में हाइड्रोक्लोरिक एसिड और एक चुटकी नमक मिलाएं। अगर घी का रंग लाल हो जाता है, तो समझिए घी में मिलावट की गई है।
- आयोडीन टेस्ट- घी का वजन बढ़ाने के लिए स्टार्च या उबले हुए आलू की प्यूरी घी में मिला दी जाती है। इसे चेक करने के लिए थोड़ा-सा घी गर्म करें और उसमें कुछ बूंदे आयोडीन सॉल्यूशन डालें। अगर घी का रंग नीला या बैंगनी हो जाता है, तो इसका मतलब है कि उसमें स्टार्च या कार्बोहाइड्रेट मिलाया गया है। शुद्ध घी में आयोडीन डालने पर रंग नहीं बदलता है।
- फ्रिज टेस्ट- एक कांच के बर्तन में थोड़ा घी लेकर उसे कुछ घंटों के लिए फ्रिज में रख दें। शुद्ध घी एक समान रूप से जमता है। जबकि मिलावटी घी या डालडा वाले घी में अलग-अलग परतें या बुलबुले नजर आने लगते हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

