हिंदू धर्म में धनतेरस (Dhanteras 2026) के पर्व का विशेष महत्व है। इसे धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। यह दीवाली के पांच दिवसीय महापर्व का पहला दिन होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान धन्वंतरि हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस पर्व को भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।
साबुत धनिया खरीदना क्यों है शुभ?
धनतेरस पर धनिया खरीदने का संबंध धन वृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस के दिन धनिया खरीदने से धन लाभ के योग बनते हैं और आर्थिक तंगी की समस्या दूर होती है। धनिया के बीज को अन्न-धान्य, उत्पादन, समृद्धि और वृद्धि का प्रतीक माना गया है।
ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति धनतेरस के दिन धनिया खरीदकर लाता है, उसे जीवन में कभी धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनिया मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है। इसलिए धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी को धनिया अर्पित करने का विशेष महत्व है। धनतेरस पर खरीदा गया धनिया समृद्धि और सुख-शांति का शुभ प्रतीक माना जाता है।
धनतेरस पर साबुत धनिया का क्या करें?
दीवाली की पूजा के दौरान मां लक्ष्मी को अर्पित किया गया साबुत धनिया लाल या पीले कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से तिजोरी कभी खाली नहीं होती है। साथ ही घर में साल भर बरकत बनी रहती है।
पूजा में इस्तेमाल किए गए थोड़े से धनिए को घर के किसी गमले या कच्ची मिट्टी में बो दें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर धनिया अच्छी तरह से उगता है और पौधा हरा-भरा रहता है, तो यह साल भर घर में आर्थिक वृद्धि और सुख-समृद्धि आने का संकेत माना जाता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

