Jeolikote Jaundice Outbreak: नैनीताल हाई कोर्ट ने लगाई फटकार, कहा- ‘अधिकारी संवेदनशील नहीं’

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हाई कोर्ट में नैनीताल के ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पानी से बीमारी फैलने के मामले सुनवाई करते राज्य प्रदूषण प्रदूषण बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में सप्लाई किए जा रहा पानी दूषित पाए जाने पर अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई।

कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारी ग्रामीणों के स्वास्थ्य को लेकर संवेदनशील नहीं हैं। एक माह पूर्व ग्रामीणों की ओर से बदबूदार पानी की शिकायत करने के बावजूद समय पर संज्ञान न लेने और संतोषजनक कदम न उठाने पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई। कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को पूरे मामले की सीधी निगरानी करने, मुख्य सचिव के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अगले सप्ताह तक व्यक्तिगत शपथपत्र पेश करने के निर्देश दिए।

व्यक्तिगत शपथपत्र पेश करने के निर्देश

अगली सुनवाई में अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी से छूट देने से भी कोर्ट ने इन्कार कर दिया। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में डीएम ललित मोहन रयाल, जल संस्थान के अधीक्षण अभियंता विशाल सक्सेना, अधिशासी अभियंता अनीश पिल्लई, पेयजल निगम के अधीक्षण अभियंता अशोक कुमार कटारिया, अधिशासी अभियंता शशिपाल सिंह, सीएमओ डा.रश्मि पंत व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुए।

डीएम ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि पानी के सैंपल फेल होने के मामले में जल संस्थान की जवाबदेही तय की जाएगी। डीएम ने अब हालात सामान्य होने, अब जल स्रोतों के सैंपल सामान्य पाए जाने का दावा किया। यह भी बताया कि मामले की जांच के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में जांच कमेटी का गठन किया गया है।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने खोली जल संस्थान के दावों की पोल

नैनीताल: मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में सुनवाई के दौरान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से देहरादून प्रयोगशाला में कराई गई सैंपल की जांच रिपोर्ट पेश कर जल संस्थान के दावों की पोल खोल दी। पीसीबी की ओर से वीरभट्टी, बेलुवाखान, पार्वती प्रेमा जगाती स्कूल और सड़ियाताल, चोपड़ा, ज्योलीकोट तथा निजी स्तर से ट्रैप पानी समेत 10 जगहों से सैंपल लिया गया था, सभी सैंपल इंडियन ड्रिंकिंग वाटर लैब की जांच में फेल पाए गए और पानी में घातक बैक्टीरिया या ई कोलाई मिला।

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में भी पांच में से चार सैंपल फेल पाए गए। इस पर कोर्ट ने जल संस्थान के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। जल संस्थान की ओर से बताया गया कि पीसीबी की ओर से आठ सितंबर को सैंपल लिए गए थे, जबकि अब क्लोरीनेशन, टैंकों की सफाई आदि के बाद 12 सितंबर के सैंपल की रिपोर्ट सामान्य पाई गई है। यह भी बताया कि क्षेत्र में टैंकरों से शुद्ध पानी बांटा जा रहा है।

मंगलवार को खुर्पाताल क्षेत्र के निवासियों की ओर से भी एक प्रार्थना पत्र कोर्ट में पेश किया गया । जिसमें कालाढूंगी रोड में सड़ियाताल झील के आसपास सीवर लाइन चोक होकर गंदगी पेयजल स्रोतों व पेयजल लाइन से जुड़ने से क्षेत्र में बीमारी फैलने की आशंका जताई गई है, जिसे कोर्ट ने रिकॉर्ड में लिया है।

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