मंच पर वेदमंत्रों की मंगल ध्वनि… वातावरण में धूप और पुष्पों की सुगंध… हाथों में श्रीरामचरितमानस और जपमाला… और सामने आस्था का उमड़ता सागर। संत मोरारी बापू की सहज, सरस और ओजस्वी वाणी से जैसे ही श्रीरामनाम का स्वर फूटा।
किसी की आंखों में प्रतीक्षा के आंसू थे तो किसी के अधरों पर श्रीराम का नाम। ऋषि पंचमी के पावन अवसर पर मंगलवार से करुणानिधान परिवार के नौ दिवसीय श्रीरामकथा का भव्य शुभारंभ हो गया। वेदमंत्रों, शांति पाठ और मंगलाचरण से कथा आरंभ हुई।
बाल कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बाद मोरारी बापू ने गुरु वंदन, रघुनंदन और हनुमंत वंदना के साथ श्रीरामचरितमानस का पाठ आरंभ किया। बापू की वाणी के साथ जब हजारों कंठों ने मानस की चौपाइयां दोहराईं तो वातावरण में ऐसी आध्यात्मिक तरंग उठी, मानो आयोजन स्थल कुछ देर के लिए रामनाम की अयोध्या बन गई हो।
ऋषि पंचमी के दिन कथा आरंभ होने को मोरारी बापू ने विशेष आध्यात्मिक संयोग बताया। कहा कि आगरा सिर्फ इतिहास की नगरी नहीं, आध्यात्मिक चेतना की भूमि भी है। 23 वर्ष बाद यहां श्रीरामकथा कहने का अवसर मिलना भावपूर्ण अनुभव है।
एक ओर गणेश उत्सव का पावन वातावरण, दूसरी ओर जैन समाज का पवित्र पर्यूषण पर्व और इसी बीच ऋषि पंचमी। ऋषि-मुनियों के स्मरण के इस पवित्र अवसर को देखते हुए कथा का प्रथम दिवस मानस ऋषि पंचमी रखा गया है।
कथा के पहले दिन मोरारी बापू ने ऋषि और मुनि स्वरूप को जीवन से जोड़ते हुए समझाया कि वाणी से जगत को जागरूक करने वाला ऋषि है और मौन के माध्यम से अपने भीतर उतरने वाला मुनि। जीवन में यह विवेक होना चाहिए कि कहां वाणी आवश्यक है और कहां मौन साधना बन जाता है।
देवर्षि नारद, राजर्षि, ब्रह्मर्षि, महर्षि वाल्मीकि, गुरु वशिष्ठ, विश्वामित्र, याज्ञवल्क्य और महर्षि भारद्वाज जैसे ऋषियों का स्मरण कर कहा कि यह श्रीरामचरितमानस के तेजस्वी नक्षत्र हैं।
भगवान श्रीराम के जीवन में विश्वामित्र का मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। तुलसीदास जी की मानस की प्रत्येक चौपाई और सोरठे में रामरस भरा है। मानस सिर्फ पढ़ने का ग्रंथ नहीं, जीवन को राममय बनाने का पथ है।
सियाराममय सब जग जानी में छिपा जीवन का मर्म
बापू ने मानस की प्रसिद्ध चौपाई सियाराममय सब जग जानी.. के भाव को जीवन में उतारने का संदेश दिया कि जब मनुष्य हर जीव में सीताराम का दर्शन करने लगता है तो निंदा, ईर्ष्या और द्वेष के लिए मन में स्थान कम होता चला जाता है।
उपनिषदों में समस्त जगत को ब्रह्ममय बताया गया है, जबकि श्रीरामचरितमानस उसे सीताराममय दृष्टि से देखने की प्रेरणा देती है। यही दृष्टि मनुष्य के भीतर प्रेम, करुणा और सद्भाव का विस्तार करती है।
हनुमान से सीखें समर्पण, गणेश जी से विवेक
हनुमान और गणेश जी, दोनों ही भगवान शिव से जुड़े दिव्य स्वरूप हैं और दोनों के साथ सिंदूर का विशेष संबंध है। हनुमान जी के हृदय में स्वयं सीताराम विराजमान हैं। इसलिए उनकी सबसे बड़ी पहचान उनका वैभव नहीं, उनका समर्पण है।
गणेश जी से विवेक और हनुमान जी से समर्पण सीखें। सत्संग मनुष्य के जीवन को भीतर से बदल देता है। सूर्य को नमस्कार करें या न करें, लेकिन उसके प्रकाश में जीना अवश्य सीखें।
मानस के गुटके और जपमाला लेकर पहुंचे श्रद्धालु
कथा में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु शामिल होने पहुंचे हैं। कथा के पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने साथ श्रीरामचरितमानस के गुटके और जपमाला लेकर पहुंचे। संत मोरारी बापू के साथ मानस की चौपाइयों का पाठ करते हुए श्रद्धालुओं की सामूहिक स्वर-लहरी पूरे पंडाल में गूंजती रही।
आगरा के श्रद्धालु 23 वर्ष बाद उन्हें अपने बीच पाकर भावविभोर दिखे। किसी ने आंखें बंद कर रामनाम का स्मरण किया तो किसी की आंखों से भक्ति के आंसू छलक पड़े। कथा सुनते-सुनते श्रद्धालुओं के चेहरे पर शांति और आनंद का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहे थे।
हनुमंत वंदना और हनुमान चालीसा से हुआ विश्राम
प्रथम दिवस की कथा का विश्राम विनय पत्रिका में वर्णित हनुमंत वंदना के साथ हुआ। बापू ने मंगल मूर्ति मारुति नंदन.. का स्मरण कराया और श्रद्धालुओं के साथ हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया। हजारों कंठों से निकली हनुमान चालीसा ने कथा पंडाल को देर तक भक्तिरस में डुबोए रखा।
प्रथम दिवस केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, करुणानिधान परिवार के ललित गुप्ता, सतीश कुमार शाह, मनीष मित्तल, अंशुल गुप्ता और देवेश शाह आदि ने मानस जी की आरती की। नौ दिवसीय श्रीरामकथा का आयोजन 23 सितंबर तक चलेगा। बुधवार से प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक संत मोरारी बापू श्रीरामचरितमानस की कथा का रसपान कराएंगे।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

