मानसून के बाद स्क्रब टायफस और अन्य मौसमी संक्रमणों के बढ़ते मामलों के बीच हिमाचल में जांच व्यवस्था को तेज करने की तैयारी शुरू हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने ‘मिशन डायग्नोसिस’ के तहत दो मोर्चों पर काम शुरू किया है। एक ओर लैब टेक्नीशियन की कमी दूर करने के लिए एमएलटी ग्रेड-11 के 18 पदों पर बैचवाइज भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के बड़े मेडिकल कॉलेज में ऑटोमेटेड लैबोरेटरी सिस्टम लागू करने की तैयारी है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों को अलग-अलग जांच के लिए बार-बार रक्त का नमूना देने की जरूरत कम होगी। एक ही रक्त नमूने से कई जांच करने की सुविधा विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे जांच प्रक्रिया में लगने वाला समय घटाने और मरीजों को जल्द रिपोर्ट उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
शिमला में स्क्रब टायफस के मामले बढ़े
मानसून के दौरान प्रदेश में स्क्रब टायफस के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। शिमला जिले में सितंबर की शुरुआत तक 24 मामलों की पुष्टि हुई थी और इसके बाद आईजीएमसी में चार नए मामले सामने आने से वहां कुल संख्या 28 तक पहुंच गई। स्वास्थ्य विभाग ने खेतों, घास और झाड़ियों वाले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
स्वाइन फ्लू के भी मामले
आईजीएमसी और डीडीयू में वायरल लक्षणों वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। सितंबर के दूसरे सप्ताह की रिपोर्ट के अनुसार आईजीएमसी में स्क्रब टायफस के 41 और स्वाइन फ्लू के आठ पॉजिटिव मामले सामने आने की जानकारी दी गई थी। मरीजों के रक्त नमूने लेकर जांच के बाद उपचार शुरू किया जा रहा है।
बैचवाइज आधार पर पद भरने की प्रक्रिया
स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल लैब टेक्नीशियन ग्रेड-II के 18 पद बैचवाइज आधार पर भरने की प्रक्रिया शुरू की है। क्षेत्रीय और जिला रोजगार कार्यालयों से पात्र दिव्यांग अभ्यर्थियों के नाम 15 अक्टूबर तक मांगे गए हैं। जनजातीय क्षेत्रों के लिए यह समयसीमा 20 अक्टूबर रखी गई है।
इन नियुक्तियों का उद्देश्य फील्ड स्तर पर सैंपलिंग और जांच व्यवस्था को मजबूत करना है। खासकर ऐसे समय में जब बरसात के बाद संक्रमण संबंधी मामलों में बढ़ोतरी होती है, स्थानीय स्तर पर जांच क्षमता बढ़ने से मरीजों को जांच के लिए बड़े अस्पतालों पर निर्भरता कम हो सकती है।
अभी लग जाता है समय
अभी कई मामलों में मरीजों के नमूने बड़े केंद्रों तक भेजने और रिपोर्ट आने में समय लग जाता है। ऐसे में बुखार और संक्रमण के लक्षण वाले मरीजों के लिए जल्द जांच उपलब्ध होना अहम है। स्वास्थ्य विभाग की नई व्यवस्था का फोकस सैंपलिंग से लेकर रिपोर्ट तक पूरी प्रक्रिया को तेज करने पर है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

