नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और विधायक तनवीर सादिक का एक बयान कश्मीर की सियासत में बड़ा विवाद बन गया है। शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की 44वीं पुण्यतिथि के मौके पर गरीबी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा था कि आजादी के समय कश्मीर में इतनी गरीबी थी कि एक पूरे गांव में पहनने के लिए सिर्फ एक ही पायजामा हुआ करता था। उनके इस बयान को लेकर अब भारतीय जनता पार्टी और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी दोनों ने मोर्चा खोल दिया है।
ठाकुर ने सवाल उठाया कि क्या नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता को कश्मीर की सदियों पुरानी पहचान का अंदाजा भी है, जो ऋषियों, विद्वानों और सूफी-संतों की धरती रही है। भाजपा ने मांग की है कि तनवीर सादिक तुरंत अपना बयान वापस लें और कश्मीर के लोगों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
PDP ने भी कहा- बिना शर्त माफी मांगे
आमतौर पर भाजपा की विरोधी रही पीडीपी भी इस बार उसी लाइन पर खड़ी नजर आई। पीडीपी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए सीधा यह सवाल दागा कि क्या नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रवक्ता कश्मीरियों के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणी के लिए बिना शर्त माफी मांगेंगे?
पीडीपी का कहना है कि इस तरह के बयान से कश्मीरियों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है। आपको बता दें कि तनवीर सादिक गत मंगलवार को शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की बरसी पर पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा था कि देश की आजादी के वक्त कश्मीर में भयानक गरीबी थी और शेख अब्दुल्ला ने ही अपने ऐतिहासिक फैसलों जैसे जमीन सुधार और मुफ्त शिक्षा के जरिए कश्मीर को उस गरीबी से बाहर निकाला। इसी संदर्भ में उन्होंने गांव में एक पायजामे वाली बात कही थी।
सादिक के समर्थकों का तर्क
सादिक के समर्थकों का तर्क है कि उनका मकसद कश्मीरियों का अपमान नहीं, बल्कि उस दौर की गरीबी और शेख साहब के योगदान को रेखांकित करना था। लेकिन विरोधियों ने इसे कश्मीरियत पर हमला बना दिया है।
फिलहाल नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से इस पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है, लेकिन इस एक बयान ने जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ दल को विपक्ष के निशाने पर ला दिया है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

