घर-बार छोड़कर बाढ़ की विभीषिका से बचने के लिए राहत शिविर में पहुंचे हजारों लोगों के सामने अब पेट भरने की चुनौती खड़ी हो गई है।
राघोपुर मध्य विद्यालय में बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन की व्यवस्था तो की गई है, लेकिन पर्याप्त बैठने और भोजन कराने की व्यवस्था नहीं होने के कारण कई लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
भूख से परेशान बाढ़ पीड़ितों का दर्द मंगलवार को गुस्से में बदल गया और भोजन व्यवस्था को लेकर जमकर हंगामा तथा मारपीट हो गई।
4000 पीड़ित, टेबल 16
बताया जा रहा है कि यहां करीब 4000 बाढ़ पीड़ितों को भोजन कराने की व्यवस्था की गई है, लेकिन एक बार में भोजन कराने के लिए मात्र 16 टेबल लगाए गए हैं, जिन पर करीब 70 से 75 लोग ही एक साथ बैठकर खाना खा पा रहे हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में बाढ़ पीड़ित भोजन के लिए अपनी बारी का इंतजार करते रह जाते हैं।
बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने अपना घर, सामान और रोजमर्रा की जिंदगी सब कुछ बाढ़ के हवाले कर दिया है। राहत शिविर में रहने वाले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए घंटों भोजन का इंतजार करना किसी परेशानी से कम नहीं है।
कई लोगों का कहना है कि जब सरकार और प्रशासन ने हजारों लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की है तो फिर उसी अनुपात में भोजन कराने की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
पर्याप्त व्यवस्था की मांग
बाढ़ पीड़ितों की मांग है कि 4000 लोगों को भोजन कराने के लिए पर्याप्त संख्या में टेबल और बैठने की व्यवस्था की जाए तथा भोजन वितरण की अलग-अलग व्यवस्था बनाई जाए, ताकि किसी को भूखे पेट वापस न लौटना पड़े।
राहत शिविर में मंगलवार को हुई मारपीट की घटना ने व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ितों का कहना है कि भूख और परेशानी से जूझ रहे लोगों के बीच यदि समय पर और व्यवस्थित तरीके से भोजन कराया जाए तो विवाद की स्थिति पैदा ही नहीं होगी।
भूखे लौट जाते हैं बुजुर्ग
ग्रामीणों का कहना है कि दो टाईम खाना खाने के लिए घंटों खड़ा रहना पड़ता है। खाने में भी हड़बड़ाहट रहती है, कम सीट के कारण खाने के दौरान सब लोग पीठ पर खड़े हो जाते हैं और कुर्सी हिलाते रहते हैं। बूढ़े मां-बाप इंतजार करते-करते भूखे लौट जाते हैं।
बाढ़ ने इन लोगों से उनका आशियाना छीन लिया है। अब राहत शिविर में दो वक्त की रोटी के लिए होने वाला इंतजार उनके दर्द को और बढ़ा रहा है।
प्रशासन को चाहिए कि राहत व्यवस्था को केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर मौजूद बाढ़ पीड़ितों की जरूरत के मुताबिक मजबूत करें।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

