आगरा: तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर वृद्ध से मांगे 81 लाख, बैंक मैनेजर की सूझबूझ आई काम

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साइबर अपराधियों ने 80 वर्ष के वृद्ध को तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। परिवार को मारने की धमकी देकर उनकी जमा पूंजी के बारे में जानकारी हासिल कर ली। दहशत में आकर वृद्ध 81 लाख रुपये साइबर अपराधियों के खाते में स्थानांतरित करने पहुंचे थे।

बैंक की सूझबूझ के चलते उनकी जीवन भर की जमा पूंजी साइबर अपराधियों के खातों में जाने से बच गई। स्वजन ने साइबर क्राइम थाने जाकर पूरी घटना की जानकारी दी। साइबर क्राइम सेल ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

मामला सिकंदरा आवास विकास कालोनी सेक्टर दस स्थित केनरा बैंक की शाखा का है। दोपहर 12 बजे वृद्ध शाखा में लगभग 81 लाख की आरटीजीएस कराने आए। यह राशि एक दिन पूर्व खाताधारक की एफडी को बंद करवाने के बाद खाते में आई थी। बड़ी राशि को देखते हुए कर्मचारी ने वृद्ध को शाखा प्रबंधक के पास भेजा।

शाखा प्रबंधक ने इतनी बड़ी राशि को किसी दूरस्थ स्थान पर भेजने का कारण पूछा। वृद्ध ने बताया कि यह राशि उनके बेटे द्वारा संपत्ति खरीदने के लिए भेज रहे हैं। प्रबंधक ने उनके बेटे का मोबाइल नंबर मांगा तो वृद्ध ने कहा कि उन्हें याद नहीं है। जिसके बाद मैनेजर ने सत्यापन के लिए वृद्ध से कुछ विवरण मांगे गए।

वृद्ध ने कहा कि विवरण उनके पास नहीं है, घर पर है। बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि वह और उनकी पत्नी घर पर अकेले रहते हैं। स्थिति को समझने और खाते में होने वाले सामान्य लेन-देन को देखने के लिए शाखा प्रबंधक ने बिना वृद्ध को इसकी जानकारी दिए खाते का स्टेटमेंट निकाला। लेन-देन का तरीका असामान्य एवं संदिग्ध था।

वृद्ध ने कभी इतनी बड़ी रकम नहीं निकाली थी। इसी के आधार पर बैंक मैनेजर ने एक कर्मचारी को उनके घर भेजा। जिससे यह पता लगाया जा सके कि घर के अन्य सदस्यों को इस लेन-देन की जानकारी है कि नहीं, संयुक्त खाताधारक से इसकी पुष्टि की जा सके तथा घर पर कोई असामान्य परिस्थिति तो नहीं है।

घर पहुंची महिला बैंक अधिकारी को अंदर आने की अनुमति नहीं दी गई। उनका व्यवहार भी अपेक्षित रूप से सहयोगात्मक नहीं था। इसी दौरान वृद्ध शाखा प्रबंधक के केबिन में मौजूद थे।

बैंक मैनेजर ने उनसे कहा कि यदि सभी आवश्यक जानकारी और दस्तावेज घर पर हैं, तो वह बैंक अधिकारियों के साथ घर चलकर आवश्यक सत्यापन में मदद करें। वृद्ध तैयार हो गए,लेकिन जैसे ही वे शाखा से बाहर आए, उन्होंने कहा “मैं अपनी गाड़ी से जाऊंगा, आप लोग मेरे पीछे आ जाइए।” वह स्कूटर से निकल गए लेकिन घर नहीं पहुंचे।

इधर, बैंक मैनेजर समेत दो अधिकारी वृद्ध के घर पहुंचे और कम से कम परिवार के किसी सदस्य से फोन पर बात कराने का अनुरोध किया। परिवार की एक महिला बाहर आईं और उन्होंने वृद्ध की पुत्रवधू से बात कराई। पुत्रवधू की प्रारंभिक प्रतिक्रिया कुछ तीखी थी।

उन्होंने बैंक अधिकारियों से सवाल किया कि बिना किसी पूर्व सूचना के उनके घर क्यों और किस आधार पर आए हैं? जिस पर बैंक मैनेजर ने उनसे लेन-देन के संबंध में जानकारी मांगी और इस विषय पर व्यक्तिगत रूप से मिलने का अनुरोध किया। पुत्रवधू ने लगभग एक घंटे बाद मिलने की कहा। इस बीच बैंक ने वृद्ध की रकम स्थानांतरित नहीं की।

आपकी सतर्कता ने बचा ली जीवन भर की बचत

पुत्रवधू ने बैंक मैनेजर से संपर्क करके बताया कि ससुर तीन दिन से डिजिटल अरेस्ट थे। उन्हें लगातार धमकी मिल रही थीं।

साइबर अपराधियों की धमकी से दहशत में आकर उन्होंने अपनी सारी जमा पूंजी साइबर अपराधियों के खातों में स्थानांतरित करने की तैयारी कर ली थी। बैंक की सूझबूझ से यह रकम बच गई। स्वजन ने पूरे मामले की साइबर क्राइम थाने में शिकायत की।

ऐसे बचें

  • अधिक लाभ कमाने के लालच में न आएं। शेयर व क्रिप्टों में ट्रेडिंग के साथ ही सोने-चांदी में निवेश के लिए रजिस्टर्ड ब्रोकर कंपनी को ही चुनें।
  • अगर कोई फोन पर पुलिस, सीबीआइ अधिकारी बनकर डराता-धमकाता है, तो डरें नहीं। तत्काल नजदीकी थाने में शिकायत करें।
  • किसी भी राज्य की पुलिस कभी किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है, संबंधित को नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए थाने बुलाती है।
  • किसी भी तरह की एपीके फाइल को अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड न करें।
  • बैंक खाते के अलावा डेबिट और क्रेडिट कार्ड की डिटेल किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ शेयर न करें।
  • साइबर ठगी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 के अलावा साइबर थाने या नजदीकी थाने में शिकायत करें।

डिजिटल अरेस्ट की दहशत में जा चुकी है शिक्षिका की जान

जगदीशपुरा के अवधपुरी निवासी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका मालती शर्मा को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखा साइबर अपराधियों ने जान ले ली थी। अछनेरा में विद्यालय में माैजूद शिक्षिका मालती शर्मा के मोबाइल पर 30 सितंबर 2024 को वाट्सएप काल आई।

जिस पर पुलिस अधिकारी की डीपी लगी थी। उनकी बेटी को पकड़ने की जानकारी देते हुए तत्काल रकम की व्यवस्था करने को कहा गया। वह घबराकर घर आ गयीं, बेटे ने बताया कि बहन सकुशल है। मगर, साइबर अपराधियों के काल से दहशत में आयी शिक्षिका को दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गयी।

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