Bhagalpur Flood News: गंगा नदी के जलस्तर में पिछले कई दिनों से हो रही अप्रत्याशित वृद्धि पर बुधवार को आखिरकार विराम लग गया। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के रियल टाइम आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार से बुधवार सुबह 10:00 बजे तक भागलपुर में गंगा का जलस्तर 34.60 मीटर पर पूरी तरह स्थिर दर्ज किया गया। नदी वर्तमान में अपने खतरे के निशान (33.68 मीटर) से 92 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, जबकि अपने उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) 34.86 मीटर से महज 26 सेंटीमीटर नीचे है। दिन-रात बढ़ते पानी के बीच पहली बार आए इस ठहराव ने बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों में पानी घटने की उम्मीद जगा दी है।
कहलगांव और पीरपैंती में बाढ़ से हाहाकार, 31 स्कूल बंद
मुख्यालय स्तर पर जलस्तर स्थिर होने के बावजूद कहलगांव और पीरपैंती प्रखंडों के ग्रामीण इलाकों में बाढ़ की स्थिति अत्यंत भयावह बनी हुई है। कहलगांव के नया नगर रानीदियरा, नंदगोला, भवानीपुर, रानीदियरा अस्थायी पुनर्वास स्थल और नया टोला गंगलदाई सहित कई गांव जलमग्न हैं। एकचारी-महगामा मार्ग के ऊपर से पानी की तेज धारा बहने से दर्जनों गांवों का सीधा संपर्क कट चुका है।
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भागलपुर में 34.60 मीटर पर स्थिर हुआ गंगा का जलस्तर, डेंजर लेवल से 92 सेमी ऊपर; HFL से 26 सेमी नीचे बह रही नदी
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कहलगांव और पीरपैंती में जलप्रलय जैसे हालात; एकचारी-महगामा पथ पर चढ़ा पानी, दर्जनों गांव सैलाब में घिरे
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पीरपैंती के 15 से अधिक पंचायतों में घुसा बाढ़ का पानी, 31 विद्यालय बंद; प्रशासन ने शुरू कराईं 22 सामुदायिक रसोई
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नाथनगर और अकबरनगर में एनएच-80 पर बहाव स्थिर, नवगछिया के तटबंधों पर पानी का दबाव बरकरार
पीरपैंती प्रखंड की स्थिति और भी विकट है। यहां रानीदियारा, एकचारी, मोहनपुर, खवासपुर, परशुरामपुर, गोविंदपुर, मधुबन, बाखरपुर पूर्वी व पश्चिमी, श्रीमतपुर, गोपालीचक, श्रीमतपुर हुजूरनगर तथा बाबूपुर पंचायतों में बाढ़ का पानी घरों में घुस चुका है। मानिकपुर, पीरपैंती और हरिणकोल के कई वार्डों में पानी भरा हुआ है।
सुरक्षा को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों के 31 विद्यालयों को बंद कर दिया गया है। अंचल प्रशासन ने 22 स्थानों पर सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) शुरू कर दोनों वक्त का भोजन उपलब्ध कराना शुरू किया है। हालांकि, प्रशासन की ओर से मात्र 15 नावें उतारे जाने से विशाल आबादी के बीच आवागमन का भारी संकट खड़ा हो गया है।
नाथनगर-अकबरनगर में ठहराव, नवगछिया के तटबंधों पर पहरा
उधर, नाथनगर में मंगलवार रात 12 बजे के बाद पानी का फैलाव थम गया। ग्रामीणों को उम्मीद है कि दोपहर बाद जलस्तर में कमी दिखने लगेगी। अकबरनगर में भी एनएच-80 के ऊपर बह रहे पानी की रफ्तार सुबह तक स्थिर रही। हालांकि सड़कों और निचले रिहायशी इलाकों में पानी जमा होने के कारण तेज धारा वाले स्थलों पर आवागमन अब भी जानलेवा बना हुआ है।
नवगछिया अनुमंडल के गोपालपुर, इस्माइलपुर और रंगरा प्रखंडों में भी बाढ़ का पानी स्थिर है। यहां भी विस्थापितों के लिए सामुदायिक रसोई का संचालन किया जा रहा है। बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल की टीमें तटबंधों पर लगातार निगरानी रख रही हैं, क्योंकि पानी का दबाव अब भी स्परों और बांधों पर बना हुआ है। यदि ऊपरी इलाकों का घटाव जारी रहा, तो भागलपुर जिले को बड़ी तबाही से राहत मिल जाएगी।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

