बिहार में बाढ़ के बीच पटना के अस्पतालों में पहुंचे सांप काटने के 81 मरीज, झाड़-फूंक के चक्कर में 9 की मौत

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 बाढ़ का पानी फैलने के साथ ही प्रदेश के प्रभावित जिलों में सर्पदंश के मामले बढ़ने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जलजमाव और जंगल-झाड़ियों में सांप निकलने के कारण लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। पिछले करीब 50 दिनों में सर्पदंश के 81 मरीज पटना के प्रमुख अस्पतालों में उपचार के लिए पहुंचे। इनमें नौ मरीजों की मौत हो गई।

चिकित्सकों के अनुसार, कई मामलों में अस्पताल पहुंचने में हुई देरी से मरीजों की स्थिति गंभीर हो गई। सर्पदंश के सबसे अधिक 38 मरीज पीएमसीएच, 16 आइजीआइएमएस, 15 एनएमसीएच, सात एम्स पटना और पांच न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल पहुंचे।

अस्पतालों में भर्ती मरीजों के मामलों की पड़ताल में सामने आया कि मृतकों में पांच ऐसे थे, जिन्हें स्वजन पहले झाड़फूंक के लिए ले गए। हालत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल लाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

समय पर इलाज मिलने पर बच सकती है जान

न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल के निदेशक डॉ. मनोज कुमार सिन्हा ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से सर्पदंश के मरीजों की संख्या बढ़ी है। इसे देखते हुए अस्पताल को अलर्ट पर रखा गया है और एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

उन्होंने कहा कि सांप के काटने पर किसी भी तरह का घरेलू उपचार या झाड़ फूंक कराने के बजाय मरीज को तत्काल अस्पताल ले जाना चाहिए। चिकित्सकीय जांच के बाद जरूरत के अनुसार एंटी-स्नेक वेनम दिया जाता है। इलाज में देरी होने पर जहर का असर बढ़ सकता है और मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है।

सांप काटे तो ये गलती न करें

  • मरीज को घबराने न दें और उसे शांत रखें।
  • सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश न करें।
  • काटे गए स्थान पर कसकर पट्टी या रस्सी न बांधें।
  • घाव को काटने या चूसने का प्रयास न करें।
  • झाड़फूंक या पारंपरिक उपचार में समय न गंवाएं।
  • मरीज को जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल ले जाएं।

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