समिट बिल्डिंग में संचालित अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ रोज नए राज सामने आ रहे हैं। अब साइबर पुलिस के हाथ दो ऐसे अमेरिकी टोल फ्री नंबर लगे हैं, जिनका इस्तेमाल कर अमेरिकी नागरिकों को ठगी का शिकार बनाया जाता था।
लखनऊ पुलिस इन नंबरों को उचित माध्यम से अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा करेगी, जिससे अमेरिका में बैठे गिरोह के मददगारों तक पहुंचने और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में मदद मिलेगी।
संयुक्त पुलिस आयुक्त (जेसीपी) अपराध एवं मुख्यालय अपर्णा कुमार ने बताया कि अमेरिका में मौजूद स्कैमर्स पहले टोल फ्री नंबर खरीदते थे और फिर उन्हें वाट्सएप ग्रुप के माध्यम से भारत में सक्रिय गिरोह के सदस्यों को उपलब्ध कराते थे। इन नंबरों पर कॉल पूरी तरह मुफ्त होने के कारण अमेरिकी नागरिक आसानी से इनके झांसे में आ जाते थे।
ठग पहले लोगों के मोबाइल पर बड़ी संख्या में संदेश भेजकर उन्हें शिकायत दर्ज कराने या तकनीकी सहायता लेने के लिए इन टोल फ्री नंबरों पर कॉल करने के लिए प्रेरित करते थे। जांच के दौरान क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने एक टोल फ्री नंबर 1888624…. समेत दो नंबरों की पहचान की है।
पुलिस मुख्यालय के माध्यम से यह जानकारी अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को भेजी जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इन नंबरों के जरिए अमेरिका में बैठे उन लोगों तक पहुंचा जा सकेगा, जो इस साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहे थे।
जेसीपी ने बताया कि अमेरिका में सोमोस संस्था टोल फ्री नंबरों के पंजीकरण और प्रबंधन का काम करती है, जबकि ट्रेसबैक संदिग्ध और धोखाधड़ी वाली कॉल के स्रोत की तकनीकी जानकारी जुटाने में मदद करती है। भारतीय एजेंसियों की ओर से साझा की जाने वाली जानकारी के आधार पर अमेरिकी प्राधिकरण इन संस्थाओं की मदद से आगे की कार्रवाई करेंगे।
सोलारिस साल्यूशन नहीं बल्कि जाइकाम के नाम से चलता था कॉल सेंटर
पुलिस विवेचना में यह भी सामने आया है कि कॉल सेंटर का किराया नामा सोलारिस साल्यूशन के नाम पर नहीं, बल्कि जाइकाम टेक्नोलाजीज के नाम पर किया गया था। इसका विधिक स्वामित्व गिरफ्तार आरोपित नायकर जयराज से जुड़ा पाया गया है। इसके अलावा हवाला लेन-देन और मनी ट्रेल की भी गहन जांच की जा रही है।
चार्ल्स की जानकारी के लिए चारों ली जाएगी कस्टडी रिमांड
पुलिस ने बताया कि चार्ल्स तक पहुंचने के लिए पुलिस संचालक विनीत, प्रोग्राममैनेजर समेत चारों की पुलिस कस्टडी रिमांड लेगी। उनको आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी, ताकि प्रमुख तथ्य सामने आ सके। यही नहीं सभी के बयान फिर से नोट होंगे।
यह था मामला
बीती एक जुलाई को साइबर क्राइम सेल और साइबर थाने की टीम ने गोमतीनगर स्थित समिट बिल्डिंग में छापा मारकर अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया था। कार्रवाई के दौरान पहले 119 और बाद में मुख्य सरगना 25 हजार के इनामी विनीत वशिष्ठ समेत कुल 122 आरोपित गिरफ्तार किए गए थे।
पुलिस ने 108 मोबाइल, लैपटाप और अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण बरामद किए थे। गिरोह अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी कर रहा था।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

