पर्यावरण और जंगलों की सेहत का महत्वपूर्ण संकेतक
धारीदार अल्बाट्रॉस से लेकर ‘ब्लू मून’ तक की झलक
जीव-जंतु एवं पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ प्रभात कुमार के अनुसार, झारखंड के जंगलों में कई अत्यंत आकर्षक और दुर्लभ प्रजातियां मौजूद हैं। इनमें मुख्य रूप से:
- मन मॉरमोन (Common Mormon): काले पंखों पर सफेद धब्बों के कारण आसानी से पहचानी जाती है।
- लेमन इमिग्रेंट (Lemon Immigrant): हल्के पीले रंग के पंख इसे बेहद खूबसूरत बनाते हैं।
- लेमन पैंसी (Lemon Pansy): इसके पंखों पर आँख जैसी विशिष्ट आकृतियाँ बनी होती हैं, जो इसे अन्य प्रजातियों से अलग बनाती हैं।
- ब्लू मून (Blue Moon Butterfly): इसके पंखों पर नीले रंग की जादुई चमक देखने को मिलती है।
- अन्य प्रजातियां: इसके अलावा धारीदार अल्बाट्रॉस (Striped Albatross) और रेड पायरेट (Red Pirate) जैसी प्रजातियां भी यहाँ पाई जाती हैं।
वनस्पतियों और तितलियों की अटूट निर्भरता
विशेषज्ञ प्रभात कुमार बताते हैं कि तितलियों का पूरा जीवनचक्र जंगल की स्थानीय वनस्पतियों पर टिका है। वयस्क तितलियां जहां फूलों से मकरंद (रस) चूसकर ऊर्जा प्राप्त करती हैं, वहीं उनकी इल्लियां (Caterpillars) विशिष्ट पौधों की पत्तियों पर ही जीवित रहती हैं।इसलिए जंगलों में पौधों और फूलों की जितनी अधिक विविधता होगी, तितलियों का कुनबा भी उतना ही समृद्ध होगा।दलमा के डीएफओ (DFO) सबा आलम अंसारी ने बताया कि अकेले दलमा वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में 250 से अधिक प्रजातियों की तितलियां दर्ज की जा चुकी हैं।दलमा के जंगलों में स्थानीय फूलदार पौधों का संरक्षण, रासायनिक प्रदूषण पर रोक और प्राकृतिक जलस्रोतों को सुरक्षित रखने के लगातार प्रयास किए गए हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।विशेषज्ञों और वन विभाग का मानना है कि तितलियों के इस रंगीन संसार को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक आवासों और स्थानीय वनस्पतियों को संरक्षित रखना बेहद जरूरी है।क्योंकि प्रकृति की यह छोटी-सी जीव प्रजाति पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को जीवंत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

