मंजरी के लिए राजा से युद्ध, चंदा के लिए बगावत… रोंगटे खड़े कर देगी यूपी-बिहार की अमर गाथा ‘लोरिकायन’

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 उत्तर भारत की सबसे मशहूर लोक कथाओं की बात करें, तो लोरिकायन का जिक्र जरूर किया जाता है। बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में ये लोकगाथा काफी मशहूर है और वहां की संस्कृति का हिस्सा है। लोरिकायन को कई जगहों पर लोरिंकी या चंदैनी भी कहा जाता है।

ये लोकगाथा एक प्रेम कहानी से जुड़ी है, जिसमें प्यार के साथ-साथ शौर्य और आत्म-सम्मान की भी अनोखी झलक देखने को मिलती है। 14वीं सदी के सूफी कवि मौलाना दाऊद ने इसी लोकगाथा पर आधारित एक कविता लिखी थी, जिसे चंदायन कहा जाता है। आइए जानें क्या है लोरिकायन की कहानी और क्यों माना जाता है ये इतना खास।

मंजीरी से विवाह और सोनभद्र का युद्ध

ये लोकगाथा अहीर वीर लोरिक की है, जो अपनी शारीरिक शक्ति, मां दुर्गा की भक्ति और तलवारबाजी के लिए जाने जाते हैं। कहानी की शुरुआत सोनभद्र के अत्याचारी राजा मोलागत और मेहरा नाम के ग्वाले के द्वंद से होती है। राजा छल से जुए में मेहरा की संपत्ति और उसकी अजन्मी संतान को जीत लेता है। मेहरा के घर एक पुत्री का जन्म हुआ, जिसका नाम मंजरी रखा गया। मंजरी बेहद खूबसूरत थी, जिस पर राजा मोलागत मोहित हो गया और जबरदस्ती मंजरी से विवाह करने की कोशिश करने लगा।

मंजरी ने अपनी रक्षा के लिए वीर लोरिक को संदेश भेजा। लोरिक मंजरी की रक्षा के लिए आते हैं और सोन नदी के किनारे भीषण युद्ध होता है। इस युद्ध में लोरिक अकेले राजा और उसकी विशाल सेना को हरा देते हैं। इसके बाद लोरिक और मंजरी का विवाह हो जाता है।

इसी कहानी में वीर लोरिक पत्थर का भी जिक्र मिलता है। विदाई के समय मंजरी के कहने पर लोरिक ने अपनी तलवार से एक बड़े पत्थर के दो टुकड़े कर दिए थे, जो आज भी उस जगह पर मौजूद है। ये पत्थर लोरिक की वीरता और मंजरी के साथ उसके प्रेम की कहानी कहता है।

चंदा और लोरिक की कहानी

लोरिक की एक कहानी चंदा नाम की राजकुमारी से जुड़ा है। चंदा आरंग की राजकुमारी थी, जो बेहद रूपवती हुआ करती थी। एक बार लोरिक ने चंदा की रक्षा की और चंदा उसकी वीरता देखकर मुग्ध हो गई। लोरिक भी चंदा की खूबसूरती देखकर मंत्रमुग्ध हो गए, लेकिन चंदा का विवाह पहले ही हो चुका था।

चंदा पहले से विवाहित थी और दोनों की सामाजिक स्थिति भी काफी अलग थी। लोरिक अहीर समाज के थे और चंदा एक राजकुमारी थी। इसलिए समाज में उनके विवाह को लेकर कई रुकावटें आ रही थीं, लेकिन चंदा के प्रेम के लिए लोरिक सामाजिक बंधनों, शत्रुओं और चंदा के पूर्व पति से डटकर लड़ते हैं और सभी चुनौतियों को हराकर हल्दी-हरदी राज्य में जाकर रहने लगते हैं।

लोरिकायन का महत्व

लोरिकायन में वीरता और प्रेम दोनों का मेल देखने को मिलता है। इसलिए ये लोकगाथा वीर रस और शृंगार रस से भरी होती है। इस लोकगाथा को गीतों के जरिए सुनाया जाता है, जिसे ढोलक और टिमकी की धुन पर गाया जाता है। ये लोक गायन शैली बेहद रोमांचक होती है। इसमें गायन अभिनय और हुंकार के साथ गाते हैं, जिसे सुनकर ऐसा लगता है, जैसे आप सचमुच लोरिकायन की कहानी का हिस्सा हैं।

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