हिमाचल में 12वीं पास को भी रोगी मित्र भर्ती करने की तैयारी, योग्यता में होगा बदलाव; मिलेंगे 15 हजार रुपये

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हिमाचल प्रदेश के अस्पतालों में मरीजों और खासकर बुजुर्गों की मदद के लिए प्रस्तावित रोगी मित्रों की भर्ती में अब नर्सिंग योग्यता जरूरी नहीं होगी। सरकार 1000 रोगी मित्रों की भर्ती के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं करने की तैयारी में है। इसके लिए सचिवालय स्तर पर भर्ती नियमों में बदलाव को लेकर मंथन चल रहा है। इन रोगी मित्रों को 15 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा और भर्ती आउटसोर्स आधार पर होगी। हालांकि, कुछ अधिकारी एएनएम या नर्सिंग योग्यता को अनिवार्य रखने के पक्ष में हैं।

रोगी मित्रों का काम मरीजों का इलाज करना नहीं, बल्कि उन्हें अस्पताल में जरूरी मार्गदर्शन और सहयोग देना होगा। इसी आधार पर नर्सिंग डिप्लोमा या डिग्री की अनिवार्यता हटाकर 12वीं पास युवाओं के लिए दायरा खोलने पर विचार हो रहा है। इससे अधिक युवाओं को रोजगार का अवसर मिलने के साथ अस्पतालों में मरीज सहायता व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है।

अभी तक भर्ती प्रारूप में 12वीं के साथ नर्सिंग प्रशिक्षण और नर्सिंग काउंसिल में पंजीकरण जैसी शर्तें रखी गई थी। सचिवालय स्तर पर इसके लिए नियमों में बदलाव को लेकर चर्चा चल रही है।

बजट में हुई थी 1000 रोगी मित्रों की योजना
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने 17 मार्च 2025 को बजट 2025-26 में प्रदेश के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में करीब 1000 रोगी मित्र रखने की घोषणा की थी। इन्हें 15 हजार रुपये मासिक मानदेय देने तथा योजना पर करीब 18 करोड़ रुपये सालाना खर्च का अनुमान बताया गया था। जून 2025 में स्वास्थ्य विभाग ने भर्ती और तैनाती का प्रारूप तैयार करना शुरू किया था। नवंबर 2025 में मंत्रिमंडल ने 1000 रोगी मित्रों की नियुक्ति को मंजूरी दी।

यह होगा रोगी मित्रों को काम

रोगी मित्र अस्पतालों में विशेष रूप से 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए सहायक कड़ी का काम करेंगे। वे मरीजों को पंजीकरण, ओपीडी, वार्ड और संबंधित विभाग तक पहुंचाने, अस्पताल की व्यवस्था समझाने तथा बुजुर्गों और दिव्यांग मरीजों की सहायता करेंगे। भीड़ प्रबंधन में भी उनकी मदद ली जाएगी। आइजीएमसी शिमला, टांडा मेडिकल कालेज और चमियाना अस्पताल जैसे बड़े संस्थानों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सहायता काउंटर बनाने की योजना है।

अस्पतालों पर घटेगा दबाव

रोगी मित्रों की तैनाती से नर्सिंग और अन्य चिकित्सा कर्मियों को मरीजों को रास्ता बताने, पंजीकरण कराने और सामान्य सहायता देने जैसे कामों से राहत मिलेगी। इससे चिकित्सा स्टाफ अपना अधिक समय उपचार संबंधी कार्यों में लगा सकेगा। ग्रामीण क्षेत्रों से बड़े अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों और बुजुर्गों को भी भटकने से राहत मिलने तथा अस्पतालों में भीड़ भी कम होगी।

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