मधुबनी में राजनगर की विरासत संवारने में सीएम ने दिखाई दिलचस्पी, राजपरिसर के विकास की उम्मीद बढ़ी

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 मिथिला की ऐतिहासिक विरासत को पर्यटन के मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने की दिशा में रविवार को राजनगर राजपरिसर में महत्वपूर्ण पहल की उम्मीद जगी।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राजनगर स्थित करीब 56.2 एकड़ में फैले ऐतिहासिक परिसर और वहां मौजूद भवनों व मंदिरों की स्थिति की जानकारी ली। एसएसबी कैंप में अधिकारियों के साथ बैठक कर इसके संरक्षण, सुंदरीकरण और पर्यटन स्थल के रूप में समुचित विकास को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में डीएम आनंद शर्मा ने मुख्यमंत्री के समक्ष राजनगर की विरासत के ऐतिहासिक एवं वर्तमान पहलुओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण रखा। इसमें भूमि, धरोहर, मंदिरों, उपलब्ध अभिलेखों तथा विकास की संभावनाओं की जानकारी दी गई।

मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिकता को संरक्षित रखते हुए इसे पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। ऐसे में मुख्यमंत्री के दौरे और अधिकारियों के साथ हुई बैठक से राजनगर की विरासत के समग्र विकास को लेकर नई उम्मीद जगी है।

अब अभिलेखीय एवं कानूनी स्थिति के सत्यापन के साथ संरक्षण और विकास की योजनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रशासनिक पहल तेज होने की संभावना है।

मंदिरों और ऐतिहासिक भवनों का समृद्ध परिसर

राजनगर में धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत का अनूठा संगम है। यहां दुर्गा मंदिर, काली मंदिर, कामाख्या मंदिर, गिरिजा मंदिर, हनुमान मंदिर, नौलखा मंदिर, हाथी द्वारा, मुख्य भवन, शिव मंदिर और अर्धनारीश्वर मंदिर समेत कई महत्वपूर्ण स्थल हैं।

इन मंदिरों और भवनों की स्थापत्य शैली तथा राजपरिवार से जुड़ा इतिहास राजनगर को पर्यटन की दृष्टि से विशिष्ट बनाता है। यहां स्थित सभी मंदिर दक्षिणमुखी हैं और इनमें तांत्रिक परंपरा का समागम भी दिखाई देता है।

मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान इन ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और समग्र विकास की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य भी मंदिरों और विरासत स्थलों को संरक्षित करते हुए पर्यटकों के लिए बेहतर एवं व्यवस्थित स्थल के रूप में विकसित करना रहा।

भूमि-अभिलेखों का भी सामने आया महत्वपूर्ण पक्ष

राजनगर की भूमि से जुड़े अभिलेखीय और कानूनी पहलुओं को भी बैठक में प्रमुखता से रखा गया। डीएम ने बताया कि राजनगर की विरासत काफी पुरानी है। पूर्व में करीब 122 एकड़ में राजपरिसर की जमीन थी, लेकिन नापी के बाद अब 56.2 एकड़ ही शेष है।

प्रस्तुतीकरण में राजदरभंगा की निजी संपत्ति, पंजीकृत ट्रस्ट एवं मंदिर तथा धार्मिक ट्रस्ट व मंदिरों के रखरखाव से संबंधित संपत्तियों का उल्लेख किया गया। इनके अधिकार, हस्तांतरण और प्रबंधन से जुड़े प्रावधानों के विधिक सत्यापन की आवश्यकता भी बताई गई।

सीएस खतियान में दर्ज करीब 19.50 एकड़ मजरुआ खास भूमि का भी अलग से उल्लेख किया गया। इसके संबंध में वेस्टिंग नोटिफिकेशन, सेटलमेंट, म्यूटेशन और कब्जे से जुड़े पुराने अभिलेखों की जांच की जरूरत बताई गई।

पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित होने की संभावना

राजनगर में एक ही परिसर में ऐतिहासिक भवनों, मंदिरों, स्थापत्य कला और मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत मौजूद है। ऐसे में यदि इसके संरक्षण के साथ आधारभूत सुविधाओं, संपर्क मार्ग, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाए तो यह मिथिलांचल के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है।

मुख्यमंत्री के दौरे और अधिकारियों के साथ हुई बैठक से राजनगर की विरासत के समग्र विकास को लेकर नई उम्मीद जगी है। अब अभिलेखीय एवं कानूनी स्थिति के सत्यापन के साथ संरक्षण और विकास की योजनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रशासनिक पहल तेज होने की संभावना है।

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