मोगा के तलवंडी मालिया गांव की एक महिला ने खेती में जोखिम उठाने का साहस दिखाकर और नवाचार करके एक ऐसी मिसाल बना दी है। जिसकी चर्चा अब दूर-दूर तक होने लगी है। आधा एकड़ जमीन की मलिक इस महिला के परिवार ने 40 एकड़ जमीन किराए पर ली और खेती में इतने नवाचार किए कि अब वह साल भर में करीब 75 से 80 लाख रुपए का कृषि कारोबार कर रहे हैं।
लेकिन हमेशा से वक्त ऐसा नहीं था। जब वह शादी करके अपने ससुराल पहुंची थी तो परिवार के पास मात्र आधा एकड़ जमीन थी। जिस पर खेती करके जैसे तैसे गुजर बसर हो जाता था। उनके पति रेती ढोने का काम भी कर लिया करते थे ताकि घर के खर्चे आसानी से निकल सके।
ठेके पर ली खेती के लिए जमीन
मनदीप कौर खुद एक किसान परिवार से है। बारहवीं तक पढ़ी है। उनके दिमाग में खेती का अपना आसमान बनाने के सपने थे। उन्होंने अपने पति से बात की। दोनों ने तय किया कि वह ठेके पर खेती की जमीन लेकर उस पर भी खेती करेंगे। इरादा कर लिया, लेकिन समस्या यह थी की अधिकांश किसान ऐसे लोगों को अपनी जमीन किराए पर नहीं देते थे। जिनके खुद के पास अधिक जमीन ना हो।
उसमें यह डर रहता था कि अगर फसल किसी वजह से खराब हो गई तो उनका किराया वसूलना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में शुरुआत में इक्का दुक्का लोगों को भरोसे में लिया गया। पहले चार बीघा जमीन मिली फिर 8 बीघा जमीन मिली। धीरे-धीरे जब काम जमने लगा तो दूसरे किसानों का भी भरोसा उन पर बढ़ गया।
खुद खेतों में उतरी मनदीप
इस दौरान मनदीप ने भी कमर कसी और खेत में उतर गई। बीस साल पहले उनका हौसला बढ़ाने वालों की संख्या काफी कम थी लेकिन ताने मारने वालों की संख्या कहीं अधिक थी। एक महिला का खेतों में उतरना कई लोगों को सुहा नहीं रहा था। मनदीप ने इसकी चिंता नहीं कि उसका लक्ष्य अटल था। काम करती रही। आगे बढ़ती रही।
आज उसके पास 40 एकड़ जमीन ठेके पर है और थोड़ी सी जमीन खुद की भी है। साल भर में उन्हें करीब 28 लाख रुपए जमीन का किराया देना होता है । करीब 24 लाख रुपए खेती के अन्य खर्चों में चले जाते हैं। बाकी पैसा उनके परिवार की जेब में आ जाता है। इसका नतीजा यह है कि अनाज और सब्जियों के काम आने वाले सभी कृषि उपकरण उनके पास है उनकी ट्रैक्टर ट्रोलिया रेती ढोने का काम भी करती हैं।
कृषि उपकरण भी किराए पर देते हैं। नतीजा यह हुआ कि अब खुद का पक्का मकान है। पशुओं और कृषि उपकरणों के लिए अलग-अलग शेड बने हुए हैं। जब में पैसे हैं और खेत में फसल। पशुओं का दूध निकालकर उसे भी बेचने का काम करते हैं। अभी दंपति का एक ही सपना है की जमीन खुद की हो।
नवाचार से आया पैसे का फ्लो
पंजाब में सामान्यतः लोग धान और गेहूं की फसल ही करते हैं। 12वीं तक पड़ी मनप्रीत ने इसमें सब्जियों को भी जोड़ दिया उनका कहना है की सब्जियां डेढ़ से 2 महीने में तैयार हो जाती हैं और यह नकद फसल होती है। सर्दियों में वह अपनी जमीन के एक बड़े हिस्से पर आलू मूली गाजर गोभी और चुकंदर जैसी फसल भी लेते हैं जो सीधे मंडी में बिक जाती है इसके लिए गेहूं की फसल के रखव में थोड़ी सी कमी कर दी जाती है।
खरीफ सीजन में मक्का, मूंग और कम अवधि वाली धान की फसलें ली जाती हैं। मंदीप कौर का कहना है कि मुनाफा बढ़ाने के लिए फसल नवाचार बेहद जरूरी है।
शिक्षा का अहम रोल
उनके पति जगदीप सिंह, जो खुद भी 12वीं कक्षा तक पढ़े हैं, कहते हैं कि परिवार ने आज जो कुछ हासिल किया है, उसमें मंदीप कौर का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा हमारा परिवार पीढ़ीयो से खेती करता रहा है। लेकिन मेरे पिता और दादा के शिक्षित नहीं होने के कारण वह परंपरागत तरीके से ही खेती करते रहे। अब हमने इसमें नवाचार किया है तो उसका फायदा भी मिल रहा है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

