भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद रिश्वतखोरी पूरी तरह खत्म क्यों नहीं हो रही। हांसी में नई विजिलेंस यूनिट के उद्घाटन पर जब हरियाणा विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो के महानिदेशक अश्विंदर चावला के सामने यह सवाल आया तो उन्होंने रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा उदाहरण देकर जवाब दिया।
इसके लिए केवल बड़ी रकम की रिश्वत लेने वालों पर ही नहीं, बल्कि दो-तीन हजार रुपये मांगने वाले कर्मचारियों पर भी नजर रखी जा रही है।
चावला के अनुसार छोटी रकम लेने वाला कर्मचारी अगर दिनभर में 20 से 30 लोगों से पैसे लेता है तो उसका असर कहीं बड़ा हो जाता है।
उन्होंने दावा किया कि इस वर्ष अब तक 133 से अधिक सफल रेड की जा चुकी हैं और कार्रवाई क्लास वन व क्लास टू अधिकारियों तक भी पहुंची है।
चावला ने कहा कि भ्रष्टाचार के अधिक मामले दर्ज होने को केवल भ्रष्टाचार बढ़ने से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
अधिक कार्रवाई यह भी बताती है कि विजिलेंस की सक्रियता और पकड़ बढ़ी है। ब्यूरो का फोकस ऐसे मामलों पर है, जिनमें आम नागरिक को सरकारी काम करवाने के लिए रिश्वत देने को मजबूर किया जाता है।
मोबाइल एप बताएगा, सबसे नजदीक विजिलेंस अधिकारी कहां
एंटी करप्शन ब्यूरो अब तकनीक के जरिये शिकायतकर्ता तक अपनी पहुंच आसान करने की तैयारी में है। चावला ने बताया कि एक विशेष मोबाइल एप फिलहाल ट्रायल स्टेज में है। इसे जल्द शुरू करने की तैयारी है।
इसके माध्यम से नागरिक हेल्पलाइन से संपर्क करने के साथ गूगल लोकेशन के आधार पर अपने सबसे नजदीकी विजिलेंस कार्यालय और संबंधित अधिकारी की जानकारी हासिल कर सकेंगे।
इससे शिकायत लेकर कहां और किस अधिकारी के पास जाना है, इसकी जानकारी आसानी से मिल सकेगी।
रिश्वतखोरों को सजा दिलाने वाले गवाहों का होगा सार्वजनिक सम्मान
भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत करने के बाद अदालत तक डटे रहने वाले आम नागरिकों का हौसला बढ़ाने के लिए विजिलेंस नई पहल करने जा रही है।
अश्विंदर चावला ने बताया कि वर्ष 2021 और 2022 के दौरान जिन नागरिकों ने भ्रष्टाचार के मामलों में गवाही देकर आरोपितों को अदालत से सजा दिलाने में भूमिका निभाई।
उन्हें रेंज स्तर पर सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाएगा। उनका कहना है कि कई लोग पहचान उजागर होने के डर से शिकायत के बाद पीछे हट जाते हैं।
ऐसे में अंत तक गवाही देने वाले लोगों को सम्मानित करने से दूसरे नागरिकों को भी भ्रष्टाचार के खिलाफ सामने आने का हौसला मिलेगा।
दो हजार की रिश्वत को भी ‘छोटा मामला’ नहीं मानेगी विजिलेंस
चावला ने कहा कि रिश्वत की रकम कम होने से अपराध का प्रभाव कम नहीं हो जाता। कोई कर्मचारी दो से तीन हजार रुपये लेकर दिनभर में कई लोगों से इसी तरह रकम मांगता है तो आम जनता पर इसका व्यापक असर पड़ता है।
इसलिए ब्यूरो छोटी रिश्वत की शिकायतों पर भी कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्देश्य सरकारी व्यवस्था में ऐसा माहौल तैयार करना है, जहां नागरिक को अपने जायज काम के लिए रिश्वत न देनी पड़े।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

