भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के पीएचडी के छात्र गुरप्रीत सिंह पुत्र सतनाम सिंह ने कटौला स्थित किराये के कमरे में आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है सोमवार को ही उसका परीक्षा परिणाम आया था और उसमें असफल रहने पर उसने यह कदम उठा लिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस जांच के बाद ही मूल नतीजे पर पहुंचा जा सकता है।
वह चंबा जिले के डलहौजी के माल रोड का रहने वाला था। गुरप्रीत के पिता पहले कारपेंटर थे, अब वह पीएचसी बनीखेत में फार्मासिस्ट हैं, जबकि माता भी सीएचसी बाथरी में फार्मासिस्ट हैं। उसके बड़े भाई मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे।
सुसाइड नोट नहीं मिला
आशंका है कि उसने सोमवार रात को ही यह कदम उठा लिया था। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस नशे के कोण समेत हर पहलू से जांच कर रही है। आइआइटी प्रबंधन भी अपने स्तर पर मामले की जांच में जुटा है। पुलिस अधीक्षक मंडी विनोद कुमार ने मामले की पुष्टि की है।
कंप्रिहेंसिव परीक्षा में हुआ था असफल
जांच में यह बात सामने आई है कि गुरप्रीत सिंह कंप्रिहेंसिव (व्यापक) परीक्षा में फेल हो गया था, जिसका परिणाम सोमवार को ही आया था। पीएचडी पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद और शोध प्रबंध शुरू करने से पहले आयोजित की जाने वाली यह मुख्य अर्हता परीक्षा है। इसका मूल उद्देश्य यह जांचना है कि छात्र अपने विषय और शोध पद्धतियों की गहरी समझ रखता है या नहीं।
लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद विशेषज्ञों का एक बोर्ड छात्र का साक्षात्कार लेता है। इसमें छात्र को अपने लिखित उत्तरों, शोध प्रस्ताव और विषय की पकड़ पर प्रश्नों का उत्तर देना होता है।
परीक्षा पास करने के बाद ही माना जाता है औपचारिक रूप से पीएचडी उम्मीदवार
कई प्रमुख शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों में इस परीक्षा को पास करने के बाद ही छात्र को औपचारिक रूप से पीएचडी उम्मीदवार माना जाता है। यदि छात्र किसी क्षेत्र में कमजोर पाया जाता है तो समिति उसे आगे बढ़ने से पहले अतिरिक्त अध्ययन या कोर्स सुधार का सुझाव देती है। सुधार के लिए तीन से छह माह में एक अवसर मिलता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

