स्वतंत्रता दिवस समारोह में बच्चों को नहीं मिला समान अवसर! पंजाब सरकार से NHRC ने चार सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
पंजाब के सरकारी स्कूलों, खासकर सीमावर्ती, ग्रामीण, दूरदराज और कथित रूप से कम सुविधाओं वाले क्षेत्रों में स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने गंभीर रुख अपनाया है। आयोग ने आरोपों पर संज्ञान लेते हुए पंजाब सरकार के मुख्य सचिव से चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) मांगी है।
झंडारोहण से राष्ट्रगान तक पर उठे सवाल
आयोग के समक्ष दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया कि पंजाब के कई सरकारी स्कूलों में, विशेषकर सीमा क्षेत्र, ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में, स्वतंत्रता दिवस का आयोजन सरकारी निर्देशों के अनुरूप नहीं हुआ। आरोप है कि विद्यार्थियों को झंडारोहण, राष्ट्रगान और स्वतंत्रता संग्राम, संवैधानिक मूल्यों, मौलिक कर्तव्यों तथा राष्ट्रीय जिम्मेदारियों से जुड़ी गतिविधियों में सार्थक रूप से शामिल नहीं किया गया।
8 अगस्त 2026 को जारी पत्र में केस नंबर 810/19/0/2026 का उल्लेख किया गया है।
इससे बेहतर संसाधनों वाले शहरी स्कूलों की तुलना में इन बच्चों को अलग शैक्षिक और नागरिक अनुभव मिलने की आशंका जताई गई। एनएचआरसी ने स्पष्ट किया कि किसी एक स्कूल में समारोह आयोजित करने के तरीके को अपने आप मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।
लेकिन यदि प्रशासनिक लापरवाही, सरकारी निर्देशों का पालन न करने या भौगोलिक व सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के कारण बच्चों के किसी वर्ग को शैक्षिक और नागरिक अवसरों से व्यवस्थित रूप से वंचित किया गया है तो इसकी मानवाधिकार के दृष्टिकोण से जांच जरूरी है।
संविधान और शिक्षा के अधिकार का हवाला
आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता और समान संरक्षण तथा अनुच्छेद 21-ए के तहत बच्चों के निश्शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार का उल्लेख किया है। साथ ही अनुच्छेद 51-ए (ए) और (बी) के तहत संविधान, उसके आदर्शों एवं संस्थाओं के सम्मान और स्वतंत्रता संग्राम से प्रेरित आदर्शों को संजोने की जिम्मेदारी का भी उल्लेख किया।
आयोग ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 29(2) का हवाला देते हुए कहा कि पाठ्यक्रम और मूल्यांकन में संवैधानिक मूल्यों, बच्चे के सर्वांगीण विकास तथा उसकी ज्ञान, क्षमता और प्रतिभा के विकास को ध्यान में रखना जरूरी है। बच्चों को गतिविधि, खोज और अन्वेषण के माध्यम से बाल-केंद्रित एवं बाल-मित्र वातावरण में सीखने का अवसर मिलना चाहिए।
2017 के केंद्र और 2026 का सीबीएसई सर्कुलर सामने रखा
एनएचआरसी ने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 7 अगस्त 2017 को डीओ नंबर 15-3/2017-Sch.1/CDN जारी कर स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस मनाने संबंधी निर्देश दिए थे। इनमें उत्सव और देशभक्ति का वातावरण बनाने, स्वतंत्रता सेनानियों व शहीदों को याद करने, शपथ दिलाने तथा स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय उद्देश्यों से जुड़ी गतिविधियां कराने की बात थी।
आयोग ने सीबीएसई के 4 अगस्त 2026 के सर्कुलर नंबर Acad.-53/2026 का भी संज्ञान लिया है।
किन बिंदुओं पर पंजाब से रिपोर्ट मांगी
मुख्य सचिव से मांगी गई रिपोर्ट में यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि स्कूलों में बच्चों की भागीदारी में कोई असमानता थी या नहीं। यदि थी तो इसके पीछे प्रशासनिक निर्देश, निगरानी की कमी, संसाधनों की कमी, भौगोलिक बाधाएं, शिक्षकों या अधिकारियों की अनुपस्थिति, आधारभूत ढांचे की कमी अथवा कोई अन्य कारण जिम्मेदार था या नहीं। साथ ही सरकार को सुधारात्मक कदमों का ब्योरा और उनसे संबंधित दस्तावेज भी देने होंगे।
केंद्र से भी मांगा जवाब
एनएचआरसी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव से 2026 में स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए जारी दिशा-निर्देश और देशभर में बच्चों की समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय को भी चार सप्ताह में जवाब देना होगा। गृह मंत्रालय के सचिव को मामले की जांच कर अपने स्तर पर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।
राष्ट्रीय दिवस कार्यक्रमों को सार्थक बनाने के निर्देश
आयोग ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया है कि भविष्य में राष्ट्रीय दिवस के कार्यक्रम केवल औपचारिक या रस्मी आयोजन तक सीमित न रहें। उम्र के अनुरूप बच्चों को स्वतंत्रता संग्राम, संवैधानिक मूल्यों, राष्ट्रीय प्रतीकों, नागरिक कर्तव्यों, लोकतांत्रिक संस्थाओं, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव की सार्थक जानकारी दी जाए।
आयोग ने कहा कि देशभक्ति से जुड़ी गतिविधियां बच्चे के शैक्षणिक, शारीरिक, भावनात्मक, सामाजिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक विकास को प्रभावित किए बिना समग्र शिक्षा का हिस्सा होनी चाहिए।
मुख्य सचिव को आयोग के निर्देशानुसार चार सप्ताह में विस्तृत और दस्तावेजों से समर्थित कार्रवाई रिपोर्ट भेजनी होगी। पत्र के साथ शिकायत की प्रति भी संबंधित अधिकारियों को भेजी गई है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

