क्या रामजन्मभूमि ट्रस्ट में चंपतराय की वापसी होगी? आज की बैठक में हो जाएगा क्लियर, बनाए जाएंगे नए नियम

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 दो सितंबर को प्रस्तावित श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक अहम है। यह बैठक श्रीमणिराम जी की छावनी में दोपहर दो बजे से प्रांरभ होगी। इसमें प्रमुख रूप से मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चयन की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी। बैठक के एक दिन पूर्व मंगलवार को सर्वाधिक चर्चा प्रस्तावित न्यास विलेख (ट्रस्ट डीड) व न्यास नियमावली में संशोधन को लेकर रही।

ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि अंतरिम महासचिव कृष्णमोहन के प्रस्ताव पर डीड में संशोधन किया जाएगा। आखिर ट्रस्ट गठन के बाद पहली बार नियमावली में संशोधन क्यों करना पड़ रहा है, इसको लेकर नई बहस छिड़ गई है।

लोगों का मत है कि ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपतराय की वापसी का रास्ता इस संशोधन के जरिए ही तैयार किया जा सकता है। संत महांतों का तो स्पष्ट मत है कि चंपतराय की वापसी करने में ट्रस्ट को संकोच नहीं करना चाहिए।

बताया जा रहा है कि ट्रस्टियों की नियुक्ति प्रक्रिया, त्यागपत्र देने के बाद ऐसे लोगों की पुनर्वापसी के लिए नियम बनाए जा सकते हैं। साथ ही सीईओ की नियुक्ति को ट्रस्ट अंगीकार करने का प्रविधान किया जाएगा।

मंदिर से जुड़े लोग भी इन दोनों बिंदुओं से संबंधित प्रस्ताव लाए जाने की संभावना से इन्कार नहीं कर रहे। रामनगरी के अधिकांश संत पहले ही चंपतराय के समर्थन में आ चुके हैं।

ट्रस्ट की धर्म समिति के सदस्य श्रीरामवल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास कहते हैं कि पूर्व महासचिव चंपतराय की भूमिका मंदिर आंदोलन से लेकर निर्माण तक में बहुत महत्वपूर्ण रही।

एसआईटी जांच में उनका नाम नहीं है, तो उनकी ट्रस्ट में वापसी क्यों नहीं हो सकती । कहा कि ट्रस्ट को इसके लिए नियम बनाने में देर नहीं करना चाहिए। उम्मीद जताई कि संशोधन में ये बिंदु भी शामिल हो।

वशिष्ठ पीठाधीश्वर महांत राघवेशदास वेदांती कहते हैं कि ट्रस्ट डीड में संशोधन शुभसंकेत है। इसमें स्थानीय साधु-संतों की प्रमुखता दी जाए। कहते हैं कि चंपतराय का नाम एसआईटी रिपोर्ट में नहीं है, इसलिए उनकी वापस पर विचार होना चाहिए।

पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व अनिल अग्रवाल ने बताया कि किसी भी डीड में संशोधन उसमें वर्णित नियमों के आलोक में ही होता है। संशोधन क्यों किया जा रहा है यह तो ट्रस्ट की बैठक में पता चलेगा। उधर विहिप का एक बड़ा धड़ा भी चंपतराय को मंदिर संचालन से जोड़े रखना चाहता है।

ये है डीड

ट्रस्ट डीड, एक लिखित समझौता है। ये ट्रस्ट बनाने वाले, संपत्ति का प्रबंधन करने वाले और लाभ पाने वाले के बीच के संबंधों को तय करता है। राम मंदिर का ट्रस्ट दिल्ली में पंजीकृत किया गया था।

प्रस्ताव पर ही बहाल हो सकते हैं सदस्य

हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश पाठक कहते हैं कि राम मंदिर ट्रस्ट की डीड अधूरी है। इसमें किसी सदस्य को हटाने व नियुक्त करने के लिए प्रविधान वर्णित नहीं है। वस्तुत: जिस तरह सदस्यों का त्यागपत्र स्वीकार किया गया था, उसी प्रकार एक प्रस्ताव पर ही इन्हें बहाल भी किया जा सकता है, लेकिन डीडी में इसका ब्योरा अवश्य होना चाहिए।

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