बिहार BJP में पुराने चेहरों की फिर बढ़ेगी भूमिका? सम्राट चौधरी के बुलावे पर जुटेंगे 250 से ज्यादा पूर्व जिलाध्यक्ष

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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (CM Samrat Chaudhary) ने भाजपा के 250 से अधिक पूर्व जिलाध्यक्षों की बैठक लोक सेवक आवास में बुलाई है।

नेक संवाद में होने वाली इस बैठक को महज संगठनात्मक मुलाकात के बजाय राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी का पार्टी के पुराने संगठनात्मक चेहरों से पहला सीधा संवाद भाजपा की आगामी राजनीतिक रणनीति का संकेत माना जा रहा है।

मुख्‍यमंत्री स्‍वयं करेंगे अभ‍िनंदन

बैठक में सहभागी बनने वाले पूर्व जिलाध्यक्षों का मुख्यमंत्री स्वयं अभिनंदन करेंगे। दोपहर भोजन का भी प्रबंध किया गया है। दरअसल, पूर्व जिलाध्यक्ष लंबे समय तक जिलों में पार्टी रीढ़ रहे हैं।

ऐसे में उन्हें स्थानीय राजनीतिक समीकरण, कार्यकर्ताओं की सक्रियता, सामाजिक समूहों के रुख और विपक्ष की गतिविधियों की जमीनी जानकारी होती है।

माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री इन नेताओं से फीडबैक लेकर सरकार और संगठन के बीच समन्वय को और मजबूत करने की कोशिश करेंगे।

राष्‍ट्रीय संगठक समेत कई नेता होंगे शामिल

बैठक में राष्ट्रीय संगठक नागेंद्र नाथ त्रिपाठी, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी एवं प्रदेश संगठन महामंत्री भीखू भाई दलसानिया की सहभागिता होगी।

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद भाजपा संगठन में भी बदलाव की प्रक्रिया तेज हुई है। कई जिलों में नए अध्यक्षों की तैनाती के बाद पुराने संगठनात्मक नेतृत्व को साथ लेकर चलना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है।

पूर्व जिलाध्यक्षों को एक मंच पर बुलाने से संगठन के पुराने और नए नेतृत्व के बीच संवाद बढ़ाने का संदेश भी जाएगा।
बैठक का एक अहम राजनीतिक पहलू यह भी है कि पूर्व जिलाध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्रों में पार्टी के प्रभावशाली कार्यकर्ताओं और सामाजिक समीकरणों से गहराई से जुड़े हैं।

आगामी विधान परिषद चुनावी राजनीति को देखते हुए मुख्यमंत्री इनसे जमीनी फीडबैक ले सकते हैं। सरकार की योजनाओं का जनता के बीच असर, संगठन की स्थिति और किन क्षेत्रों में पार्टी को अतिरिक्त राजनीतिक सक्रियता की जरूरत है, जैसे मुद्दों पर चर्चा की संभावना है।

संगठन साधने की रणनीत‍ि का प्रयास

इसे सम्राट चौधरी की सरकार के साथ संगठन को भी साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनका पार्टी के पुराने पदाधिकारियों से संवाद यह संकेत देता है कि वे सत्ता और संगठन के बीच दूरी नहीं, बल्कि सीधा राजनीतिक संपर्क बनाए रखना चाहते हैं।

साथ ही, पूर्व जिलाध्यक्षों की सक्रियता का इस्तेमाल आने वाले समय में भाजपा के राजनीतिक विस्तार और जनसंपर्क अभियान में भी किया जा सकता है।

विशेषकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल के 25 वर्ष पूरे होने पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले कार्यक्रम में बढ़चढ़ कर सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील पार्टी के संगठन महामंत्री करेंगे।

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