पिता का साया उठा, मां ने मजदूरी कर पाला; खूंटी में उधार के धनुष से सुधीर ने अब SAI तक बनाई जगह

7.7kViews
1217 Shares

अभाव भले ही सुविधाओं की राह में बाधा बने, लेकिन मजबूत इरादों के सामने सपने नहीं रुकते। खूंटी के डूमरदगा गांव निवासी एवं नेताजी सुभाषचंद्र बोस आवासीय विद्यालय, खूंटी के छात्र सुधीर सांगा ने अपनी मेहनत और लगन से इसे साबित कर दिखाया है।

कभी उधार के धनुष से तीरंदाजी का अभ्यास करने वाले सुधीर का चयन अब भारतीय खेल प्राधिकरण (साई), हजारीबाग में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण के लिए हुआ है। पिछले महीने आयोजित चयन परीक्षा में सुधीर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए साई हजारीबाग में जगह बनाई। उसके चयन से परिवार और विद्यालय में खुशी का माहौल है।सुधीर ने वर्ष 2025 में आंध्र प्रदेश में आयोजित 13 वर्ष से कम आयु वर्ग की राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था। वह वर्ष 2024 में गुजरात और 2025 में उत्तर प्रदेश में आयोजित विद्यालयी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में झारखंड का प्रतिनिधित्व भी कर चुका है।

बचपन में ही पिता के निधन के बाद आर्थिक तंगी के बीच पले सुधीर ने बांस के धनुष से तीरंदाजी शुरू की और बाद में उधार के आधुनिक धनुष से अभ्यास करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। पिता के निधन के बाद उसकी मां बिरंग पाहन मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं।

विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, संस्थान में अनाथ, एकल अभिभावक परिवारों, बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चे तथा नक्सल प्रभावित परिवारों के बच्चों को तीरंदाजी से जोड़कर आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है।

विद्यालय के अब तक दो छात्रों का भारतीय खेल प्राधिकरण में चयन हो चुका है, जबकि आठ छात्र राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके हैं। एक छात्र एशियाई युवा पैरा खेलों में स्वर्ण पदक भी हासिल कर चुका है।सुधीर के साई में चयन से परिवार, विद्यालय और गांव में खुशी का माहौल है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *