पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा के नियमित शिक्षकों की तबादला प्रक्रिया में गेस्ट टीचरों के कब्जे वाले पदों को रिक्त मानने की मांग से जुड़े मामले में शिक्षा विभाग के पूर्व आदेश को रद्द करते हुए संबंधित प्राधिकारी को तीन महीने के भीतर नया कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के प्रतिनिधित्व पर हाई कोर्ट के पूर्व फैसलों और शिक्षक स्थानांतरण नीति-2023 के आलोक में सुनवाई कर निर्णय लिया जाए। यदि वे राहत के पात्र पाए जाते हैं तो उन्हें तत्काल उसका लाभ दिया जाए। हाई कोर्ट ने सुशीला एवं अन्य की याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश पारित किया।
याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि वे नियमित शिक्षक हैं, लेकिन गेस्ट फैकल्टी शिक्षकों के समायोजन के कारण उन्हें अपनी पसंद के स्टेशन नहीं दिए जा रहे हैं।
उन्होंने मांग की कि जिन पदों पर वर्तमान में गेस्ट टीचर कार्यरत हैं, उन्हें नियमित शिक्षकों के स्थानांतरण और स्टेशन आवंटन के उद्देश्य से रिक्त माना जाए। साथ ही उनकी ओर से दिए गए जिला एवं स्टेशन विकल्पों पर विचार किया जाए।
याचिका में यह भी मांग की गई थी कि शिक्षक स्थानांतरण नीति-2023 तथा पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आनंद कुमार बनाम हरियाणा राज्य मामले में 10 नवंबर 2017 को दिए गए फैसले के अनुरूप कार्रवाई की जाए। इसके अलावा 16 मार्च 2024 के आदेश तथा बाद में पारित 6 मई 2025 के आदेश को भी चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि यह मुद्दा पहले भी कई बार हाई कोर्ट के समक्ष आ चुका है। आनंद कुमार मामले में अदालत ने विश्व पाल एवं अन्य बनाम
हरियाणा राज्य (21 दिसंबर 2016) के निर्णय पर भरोसा करते हुए स्पष्ट किया था कि राज्य नियमित रूप से भर्ती किए गए शिक्षकों के साथ भेदभाव नहीं कर सकता और गेस्ट फैकल्टी शिक्षकों को समायोजित करने के लिए पूरी व्यवस्था को प्रभावित नहीं किया जा सकता।
उन पदों, जिन पर गेस्ट टीचर कार्यरत हैं, को स्टेशन आवंटन के उद्देश्य से रिक्त माना जाना चाहिए ताकि नियमित शिक्षक अपनी पसंद के स्टेशन चुन सकें। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि यदि उनकी ओर से दिए गए प्रतिनिधित्व पर निर्धारित समय में स्पीकिंग ऑर्डर पारित करने का निर्देश दे दिया जाए तो वे उसी से संतुष्ट होंगे।हरियाणा सरकार की ओर से इस सीमित प्रार्थना पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने 6 मई 2025 के विवादित आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं के प्रतिनिधित्व पर आनंद कुमार मामले में दिए गए निर्णय के आलोक में विचार करे, उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दे और प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से तीन महीने के भीतर कारणयुक्त आदेश पारित करे।
हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि लिए गए निर्णय की सूचना याचिकाकर्ताओं को दी जाए तथा यदि वे मांगी गई राहत के पात्र पाए जाते हैं तो संबंधित प्राधिकारी उन्हें बिना किसी विलंब के तत्काल लाभ प्रदान करे। इसी निर्देश के साथ अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

