सिंगरौली। एनसीएल की झिंगुरदा परियोजना एक बार फिर चर्चाओं में है। इस बार मामला कथित रूप से परियोजना से कबाड़ की चोरी और सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवालों का है। स्थानीय सूत्रों और क्षेत्र में चल रही चर्चाओं के अनुसार, परियोजना के एक सुरक्षा अधिकारी की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
चर्चा है कि उत्तर प्रदेश के कथित कबाड़ कारोबारियों के साथ सांठगांठ के चलते परियोजना से निकलने वाले कबाड़ पर प्रभावी निगरानी नहीं हो रही है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि भारी मात्रा में परियोजना का कबाड़ खुलेआम बाहर ले जाया जा रहा है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था मूकदर्शक बनी हुई है।
सूत्रों का यह भी दावा है कि संबंधित सुरक्षा अधिकारी पर कथित रूप से उत्तर प्रदेश के कबाड़ी कारोबारियों को परियोजना क्षेत्र के भीतर अन्य खदानों तक पहुंच दिलाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। यदि इन दावों में सच्चाई है, तो यह केवल कबाड़ चोरी का मामला नहीं बल्कि परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय है, तो आखिर परियोजना का कबाड़ बाहर कैसे पहुंच रहा है? क्या यह सब अधिकारियों की जानकारी के बिना संभव है, या फिर कहीं न कहीं व्यवस्था में गंभीर चूक अथवा मिलीभगत की आशंका है?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एनसीएल प्रबंधन इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराएगा? क्या सीसीटीवी फुटेज, और कबाड़ के परिवहन से जुड़े अभिलेखों की जांच होगी? यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध क्या कार्रवाई होगी?
शेष अगले अंक में…

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

