निगाही खदान से रोजाना लाखों के कबाड़ की चोरी का आरोप, मुख्य मार्ग से पुलिस के सामने से निकल रहे कबाड़ लोड पिकअप वाहन; NCL सिक्योरिटी कबाड़ माफिया पर मेहरबान?
सिंगरौली। जिले के नवानगर थाना क्षेत्र में स्थित एनसीएल की निगाही परियोजना की खदान से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अवैध कबाड़ चोरी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि खदान क्षेत्र से चोरी किया जा रहा कबाड़ किसी चोरी-छिपे रास्ते से नहीं, बल्कि दिन के उजाले में नवानगर थाना क्षेत्र के मुख्य मार्ग से होते हुए माजन क्षेत्र की कबाड़ दुकानों तक पहुंचाया जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मुख्य मार्ग से होकर अवैध कबाड़ से लदे वाहन लगातार गुजर रहे हैं, तो फिर पुलिस की नजर इन वाहनों पर क्यों नहीं पड़ रही? और यदि पुलिस को इसकी जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?
निगाही खदान से प्रतिदिन लाखों के कबाड़ की चोरी?
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक निगाही परियोजना के खदान क्षेत्र से प्रतिदिन लाखों रुपये मूल्य के कबाड़ की चोरी किए जाने का आरोप है। चोरी किए जा रहे कबाड़ को पिकअप सहित अन्य वाहनों में लोड कर खदान क्षेत्र से बाहर निकाला जाता है और इसके बाद नवानगर के मुख्य मार्ग से होते हुए माजन स्थित कबाड़ दुकानों तक पहुंचाया जाता है।हैरानी की बात यह है कि, कथित तौर पर यह पूरा आवागमन दिन के उजाले में भी जारी रहता है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि चोरी का कबाड़ खुलेआम मुख्य सड़क से होकर गुजर रहा है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लग रही?
मामले में स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कबाड़ से लोड पिकअप वाहन नवानगर थाना क्षेत्र के मुख्य मार्ग से होकर गुजरते हैं। यदि इन वाहनों में चोरी का कबाड़ होने की आशंका है, तो पुलिस द्वारा इनकी जांच और दस्तावेजों की पड़ताल क्यों नहीं की जाती? यह चर्चा भी है कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि मुख्य मार्ग से होकर संदिग्ध कबाड़ लदे वाहन गुजरते हैं और संबंधित जिम्मेदार महकमा प्रभावी कार्रवाई करता नजर नहीं आता।
निगाही परियोजना की सिक्योरिटी की मिलीभगत?
सिर्फ नवानगर पुलिस ही नहीं, बल्कि निगाही परियोजना की सिक्योरिटी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि परियोजना के अंदर से लगातार कबाड़ चोरी होने के बावजूद सिक्योरिटी व्यवस्था इसे रोकने में नाकाम साबित हो रही है। यदि खदान परिसर से लगातार कबाड़ बाहर निकल रहा है तो फिर परियोजना के प्रवेश और निकासी द्वारों पर तैनात सुरक्षा कर्मियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर चोरी का कबाड़ खदान परिसर से बाहर कैसे निकल रहा है और उसे बाहर ले जाने वाले वाहनों की जांच किस स्तर पर की जा रही है?

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं?
सूत्रों का दावा है कि जब कभी एनसीएल निगाही परियोजना से कबाड़ चोरी होने की शिकायत नवानगर थाने तक पहुंचती है, तो कई मामलों में कथित तौर पर प्रकरण दर्ज करने के बजाय शिकायत को आगे की कार्रवाई के बिना ही छोड़ दिया जाता है।ऐसे में यदि शिकायतें पुलिस तक पहुंच रही हैं और इसके बावजूद चोरी पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है, तो यह निश्चित तौर पर जांच का विषय है।

आखिर किसकी शह पर चल रहा है कथित कबाड़ कारोबार?
निगाही परियोजना से कथित तौर पर चोरी हो रहे कबाड़ का मुख्य मार्ग से होकर माजन की कबाड़ दुकानों तक पहुंचना कई सवाल खड़े करता है। यदि चोरी का माल परियोजना से निकलकर सीधे कबाड़ दुकानों तक पहुंच रहा है, तो इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क की जांच होना जरूरी है। सवाल यह भी है कि क्या कबाड़ चोरी करने वाले गिरोह को परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी है? क्या उन्हें अंदर से किसी प्रकार की मदद मिल रही है? क्या मुख्य मार्ग पर पुलिस की निगरानी व्यवस्था कमजोर है? और यदि पुलिस को इस गतिविधि की जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। फिलहाल निगाही परियोजना से कथित कबाड़ चोरी और उसके खुलेआम परिवहन को लेकर पुलिस, एनसीएल प्रबंधन और सिक्योरिटी व्यवस्था की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि संबंधित अधिकारी मामले की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाएं कि खदान से कबाड़ बाहर कैसे निकल रहा है, किन वाहनों के जरिए परिवहन हो रहा है और माजन क्षेत्र में यह कबाड़ किन दुकानों तक पहुंच रहा है।
अब देखना यह होगा कि नवानगर पुलिस और एनसीएल प्रबंधन इस कथित कबाड़ चोरी के मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच और कार्रवाई करता है या फिर दिनदहाड़े मुख्य मार्ग से गुजरते कबाड़ लदे वाहनों का सिलसिला यूं ही जारी रहता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

