‘रांझन दे यार बुलेया…’ आखिर कौन थे बुल्ले शाह, 300 साल बाद भी बॉलीवुड गानों में जिनका होता है जिक्र?

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आज जब भी सूफी म्युजिक, बॉलीवुड के लव सॉन्ग्स और कव्वालियों की बात होती है, तो उनमें बुल्ले शाह का जिक्र जरूर होता है। ये वही बुल्ले शाह हैं, जिन्होंने ‘वे माहिया तेरे वेखन नू, चुक चरखा गली दे विच पावा…’ लिखा था। ये गाना सोशल मीडिया पर भी आपने कई बार सुना होगा, लेकिन क्या इस गाने को लिखने वाले बुल्ले शाह की कहानी पता है?

गानों में मोहब्बत की मिसाल माने जाने वाले बुल्ले शाह आखिर थे कौन और क्यों बॉलीवुड के कई गानों में इनका जिक्र किया गया है? आइए जानें बाबा बुल्ले शाह की कहानी।

कौन थे बाबा बुल्ले शाह?

बाबा बुल्ले शाह का जन्म 1680 के आसपास पंजाब में हुआ था। उनका नाम सैयद अब्दुल्ला शाह कादरी थी, लेकिन लोग इन्हें बुल्ले शाह बुलाते थे। वे एक ऊंचे सैयद घराने में पैदा हुए थे और अरबी-फारसी के अच्छे जानकार थे, लेकिन उनके मन में अक्सर सवाल आता कि सबका खुदा एक है, तो लोगों में इतनी नफरत क्यों?

वे अपने खुदा को पाना चाहते थे और एक दिन उनकी मुलाकात सूफी संत शाह इनायत कादरी से हुई। कहा जाता है कि इनायत शाह एक माली थे, लेकिन उनकी सोच दुनिया से काफी अलग थी।

बाबा बुल्ले शाह ने जब उनसे पूछा कि भगवान कहां मिलेंगे, तो उन्होंने जवाब दिया कि रब तो लोगों के दिल में बसता है। उनकी ये बात बुल्ले शाह के दिल में घर कर गई और उन्होंने शाह इनायत को अपना गुरू बना लिया।

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