वेटलैंड का संरक्षण पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत लाभकारी है। ये प्राकृतिक स्पंज की तरह काम करती हैं जो बाढ़ को नियंत्रित व पानी को शुद्ध करने, भूजल स्तर को बढ़ाने और अनगिनत वन्यजीवों को आवास प्रदान करने में सहायक है। इसके संरक्षण से जलवायु परिवर्तन को कम करने में भी मदद मिलेगी।
उक्त बातें आद्रभुमि विशेषज्ञ डॉ. सरोजा कुमार बारिक ने पूर्णिया वन प्रमंडल के वन कर्मचारियों को वेटलैंड की जानकारी का संग्रह करने संबंधी जानकारी को लेकर आयोजित प्रशिक्षण में कही।
उन्होंने कर्मियों को जियो-टैगिंग, जैव विविधता प्रलेखन और जल निकायों को प्रभावित करने वाले खतरों की रिपोर्टिंग को लेकर व्यवहारिक मार्गदर्शन किया।
राज्य में 3,911 जल निकायों की हुई है पहचान
राज्य में आर्द्रभूमि का क्षरण 70 फीसद से अधिक हो चुका है। इसलिए इसका पुनर्स्थापन और संरक्षण करना आवश्यक है। जिससे सबक लेते हुए सरकार सात निश्चय-2 के तहत स्वच्छ गांव-समृद्ध गांव अंतर्गत चौर क्षेत्रों का विकास कर रही है, जिसमें प्रति वर्ष एक हजार हेक्टेयर आर्द्रभूमि विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इसको लेकर बिहार राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण ने पूरे राज्य में आर्द्रभूमि का व्यापक जमीनी सर्वेक्षण किया है। जिसमें बिहार के सभी जिलों को कवर करते हुए 2.25 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाले कुल 3,911 जल निकायों की पहचान की गई है। जिसमें कटिहार और पूर्णिया में सबसे अधिक जल निकाय पाए गए हैं।
इन आर्द्रभूमियों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए बिहार सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग ने सेव बिहार वेटलैंड्स नामक मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया है।
यह एप्लिकेशन जल निकायों के पारिस्थितिक महत्व, जल गुणवत्ता, जैव विविधता, अतिक्रमण और खतरों से संबंधित विस्तृत जानकारी के साथ संक्षिप्त दस्तावेज तैयार करने में मदद करता है।
अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (जलवायु परिवर्तन एवं आर्द्रभूमि) के मार्गदर्शन में, क्षेत्र स्तर के वनकर्मियों और वन रक्षकों द्वारा इस मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से आर्द्रभूमि संबंधी संक्षिप्त दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं।
क्षमता निर्माण पहल के तहत, आर्द्रभूमि विशेषज्ञ डॉ. सरोजा कुमार बारीक ने वन कर्मचारियों के लिए स्थल पर प्रशिक्षण आयोजित किया। प्रशिक्षण का उद्देश्य डिजिटल प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग और अग्रिम पंक्ति के वन कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से बिहार में आर्द्रभूमि के वैज्ञानिक प्रलेखन और संरक्षण प्रबंधन को मजबूत करना है।
जलवायु परिवर्तन को कम करने में वेटलैंड सहायक
सर्वेक्षण का उद्देश्य जल निकायों का मानचित्रण, अतिक्रमण रोकना और जैव विविधता का संरक्षण करना है। आर्द्रभूमि का संरक्षण पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत लाभकारी है। आद्रभुमि विशेषज्ञ डा. सरोजा कुमार बारिक ने बताया कि वेटलैंड प्राकृतिक स्पंज की तरह काम करती हैं।
ये स्पंज की तरह भारी वर्षा के पानी को सोख लेती हैं, जिससे बाढ़ का प्रभाव कम होता है। इनके संरक्षण से जलवायु परिवर्तन को कम करने में मदद मिलती है, क्योंकि ये कार्बन को अवशोषित करती हैं। जिससे ग्रीनहाउस गैसों में कमी आती है।
आर्द्रभूमि पानी से प्रदूषकों, पोषक तत्वों और गाद को अवशोषित कर प्राकृतिक फिल्टर के रूप में कार्य करती है, जिससे पानी साफ रहता है। विशेषज्ञ के अनुसार आर्द्रभूमि सतह के पानी को जमीन के नीचे पहुंचाती है, जिससे भूजल का स्तर बना रहता है और सूखे के समय पानी मिलता है।
ये पक्षियों, मछलियों और दुर्लभ वनस्पतियों के लिए महत्वपूर्ण आवास भी हैं। ये पर्यटन, और मनोरंजक गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय लोगों की आजीविका का साधन हैं। उन्होंने वेटलैंड के संरक्षण।


