सिर्फ राज्य का दर्जा नहीं, पहले के सभी अधिकार भी चाहिए; मीरवाइज का NC को दो टूक बोले- ‘आधा-अधूरा एजेंडा मंजूर नहीं’

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 मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलेमा (MMU) के चेयरमैन मीरवाइज उमर फारूक ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को समर्थन तो दिया, लेकिन साथ ही आंदोलन का दायरा बढ़ाने की शर्त रख दी।

जुमे के खुतबे में श्रीनगर की जामा मस्जिद से मीरवाइज ने साफ कहा कि यह लड़ाई सिर्फ राज्य का दर्जा वापस पाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मीरवाइज ने डॉ. फारूक अब्दुल्ला का न्योता मिलने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि लोगों के अधिकारों की बहाली के लिए हर ईमानदार और साझा प्रयास “समय की ज़रूरत” है। लेकिन तुरंत जोड़ दिया कि केवल राज्य का दर्जा पर्याप्त नहीं होगा।

 मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलेमा (MMU) के चेयरमैन मीरवाइज उमर फारूक ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को समर्थन तो दिया, लेकिन साथ ही आंदोलन का दायरा बढ़ाने की शर्त रख दी।

जुमे के खुतबे में श्रीनगर की जामा मस्जिद से मीरवाइज ने साफ कहा कि यह लड़ाई सिर्फ राज्य का दर्जा वापस पाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मीरवाइज ने डॉ. फारूक अब्दुल्ला का न्योता मिलने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि लोगों के अधिकारों की बहाली के लिए हर ईमानदार और साझा प्रयास “समय की ज़रूरत” है। लेकिन तुरंत जोड़ दिया कि केवल राज्य का दर्जा पर्याप्त नहीं होगा।

मीरवाइज की 3 बड़ी मांगें

  • 370 और 35A की वापसी: मीरवाइज ने कहा कि आंदोलन के एजेंडे में अनुच्छेद 370 और 35A समेत सभी छीने गए संवैधानिक अधिकारों की बहाली को शामिल किया जाए।
  • चुनावी वादा याद दिलाया: NC को उसके मेनिफेस्टो की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि जनता ने पार्टी को 2019 से पहले की स्थिति बहाल करने के वादे पर जनादेश दिया था। सत्ता में होने के नाते उस वादे को पूरा करना NC की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
  • बंदियों की रिहाई भी मुद्दा बने: उन्होंने मांग रखी कि राजनीतिक बंदियों और लंबे समय से जेलों में बंद कश्मीरी युवाओं की रिहाई को भी प्रदर्शन के एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए।

अंतिम लक्ष्य सम्मानजनक शांति

मीरवाइज ने कहा कि इस पूरे संघर्ष का अंतिम लक्ष्य सम्मानजनक और स्थायी शांति के साथ कश्मीर मुद्दे का न्यायपूर्ण समाधान होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि आंदोलन अधूरा न रहे, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को 2019 से पहले मिले सारे हक वापस दिलाए।

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