बिजनौर-हरिद्वार मार्ग पर मालन नदी का पानी आने से आवागमन रोका, कई गांव जिला मुख्यालय से कटे; रपटे पर भी डेढ़ फीट पानी

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 जिले और पहाड़ों पर हो रही बरसात से मालन नदी उफान पर है। हजारों बीघा खेतों में मालन का पानी भर गया है। मालन का पानी आने पर बिजनौर-हरिद्वार मार्ग पर वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया है।

अब इन वाहनों वाया किरतपुर से होकर निकाला जा रहा है। साथ ही बेगावाला क्षेत्र में रावली शहजादपुर रपटे पर डेढ़ फीट तक पानी उतर रहा है। एक दर्जन से अधिक गांव के लोग इस रपटे से जिला मुख्यालय पर आते हैं। रपटे पर थोड़ा और पानी आने पर आने जाने के लिए नाव का ही प्रयोग करना होगा।

मालन बरसाती नदी है। इसमें पहाड़ों की बरसात का पानी आता है। एक डेढ़ सप्ताह पहले तक इसकी धारा एकदम सूखी हुई थी, लेकिन दो दिन से जिले और पहाड़ों पर हो रही बरसात से इसमें पानी बढ़ने लगा था। शुक्रवार सुबह मालन का पानी हरिद्वार बिजनौर मार्ग पर गांव गजरौला शिव के सामने सड़क पर भी आ गया। सड़क पर दो से ढाई फीट तक पानी आ गया है।

पुलिस ने यहां से वाहनों का आवागमन बंद करा दिया है। वाया किरतपुर वाहनों को निकाला जा रहा है। कुछ लोग ट्रैक्टर ट्राली से भी लोगों को निकाल रहे हैं। मालन का यह पानी आसपास के गांवों के खेतों में भरेगा। नई पुलिस लाइन में भी पानी भर गया है। वहीं बेगावाला क्षेत्र में मालन का पानी रावली-शहजादपुर रपटे पर से उतरने लगा है।

यह रपटा शहजादपुर, रावली, बादशाहपुर, मानशापुर, भोगपुर, काजीवाला आदि दर्जन गांवों को जिला मुख्यालय से जोड़ता है। इस रपटे से भी गिने चुने लोग ही पैदल निकल रहे हैं। थोड़ा और पानी बढ़ा तो यहां से लोगों को नाव से ही निकाला जाएगा। इस तटबंध पर पानी आने से मुख्यालय पर आने वाले लोगों को मंडावर से किरतपुर होते हुए आना और जाना होगा।

इससे उनका चक्कर 30 किलोमीटर तक बढ़ जाएगा। हालांकि गंगा में पानी कम हुआ है। गुरुवार रात लगभग एक बजे बरसात बंद हो गई थी लेकिन शुक्रवार सुबह सात बजे से फिर से बरसात शुरू हो गई है। खेतों में पहले ही पानी भरा है। अभी आम जनता के साथ ही किसानों को अगले कुछ दिन तक बरसात की जरूरत नहीं है। सभी बरसात रूकने की प्रार्थना कर रहे हैं।

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