बिजलीकर्मी भी कोरोना वारियर, विधवा पत्नी को 50 लाख अनुग्रह राशि दे सरकार: इलाहाबाद हाई कोर्ट

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इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक अहम फैसले में कोविड-19 महामारी के दौरान अस्पतालों, ऑक्सीजन प्लांटों और घरों तक निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में ड्यूटी के दौरान संक्रमित होकर जान गंवाने वाले मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के एक कर्मचारी को कोरोना वारियर मानते हुए उसकी पत्नी को 50 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का आदेश दिया है।

पीठ ने राज्य सरकार द्वारा मुआवजे का दावा खारिज करने संबंधी आदेश को निरस्त करते हुए आठ सप्ताह के भीतर भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चैधरी की पीठ ने पुष्पा देवी की याचिका पर पारित किया।

याचिका में छह अक्टूबर 2022 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें यह कहते हुए 50 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने से इन्कार कर दिया गया था कि मृतक सरकार के 11 अप्रैल, 2020 के शासनादेश के दायरे में नहीं आता।

याचिका में कहा गया कि मृतक कर्मचारी विपिन कश्यप मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में कार्यरत थे और कोविड महामारी के दौरान अस्पतालों, आक्सीजन प्लांटों तथा अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने की ड्यूटी कर रहा था।

इसी दौरान वो कोरोना संक्रमित हुए और मृत्यु हो गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी तथा बिजली विभाग की ओर से जारी प्रमाणपत्रों में भी इसकी पुष्टि की गई थी। विभाग ने उनके पक्ष में अनुग्रह राशि दिए जाने की संस्तुति भी की थी। पीठ ने अपने पूर्व के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि कोरोना ड्यूटी का अर्थ केवल अस्पतालों में उपचार कार्य करने वाले कर्मियों तक सीमित नहीं किया जा सकता।

बिजली, जलापूर्ति, पुलिस और अन्य आवश्यक सेवाओं में तैनात कर्मचारी भी महामारी की रोकथाम और मरीजों के उपचार की व्यवस्था बनाए रखने में समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे, इसलिए उन्हें भी कोरोना वारियर माना जाएगा।

कोर्ट ने मामले को दोबारा अधिकारियों के पास भेजने से इन्कार करते हुए कहा कि कर्मचारी की मृत्यु को पांच वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। ऐसे में याचिकाकर्ता को और प्रतीक्षा कराने का कोई औचित्य नहीं है।

इसी आधार पर अदालत ने राज्य सरकार को प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने की तिथि से आठ सप्ताह के भीतर 50 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का आदेश दिया है।

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