26.40 करोड़ का बक्‍सर ROB: 15 दिनों में मरम्मत का दावा फेल; कब तक लोगों को झेलनी होगी जाम की समस्‍या

 दानापुर रेलमंडल के बक्सर रेलवे स्टेशन के पूर्वी छोर पर बना नया ओवरब्रिज विभागीय लापरवाही का जीता-जागता सबूत बन गया है।

जिस पुल को महज 15 दिनों के भीतर मरम्मत कर दोबारा चालू करने का दावा किया गया था, वह घटना के 21 दिन बीत जाने के बाद भी जस का तस पड़ा है। हकीकत यह है कि पूरी तरह चालू होने में कम से कम दो महीने लगेगा।

बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड की देखरेख में लगभग 26.40 करोड़ रुपए की लागत से बने संपर्क पथ और पुल के शेष हिस्से को अभी करीब एक महीने पहले ही आम जनता के लिए खोला गया था।

15 द‍िनों में ही धंस गया था बड़ा ह‍िस्‍सा

इसका कोई औपचारिक उद्घाटन भी नहीं हुआ था कि महज 15 दिनों के भीतर ही इस आरओबी के दक्षिणी छोर पर पिलर नंबर पांच के पास का एक बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया।

नुकसान अगले पिलर से जुड़े स्लैब के जोड़ पर हुआ था, जिसके बाद प्रशासन ने आनन-फानन में इस पर बड़े वाहनों के आवागमन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया।

पुल चालू होने के बाद से ही रात के समय दिनारा की तरफ से आने वाले ओवरलोडेड बालू के ट्रकों का इस पर भारी दबाव बना।

बाईपास रोड में जाम के कारण इस पुल पर ट्रकों की लंबी कतारें लग रही थीं। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि पुल के इस हिस्से में निर्माण कार्य बेहद कमजोर और गुणवत्ताविहीन था।

वह बालू लदे ट्रकों का भार सहन नहीं कर सका और पहली परीक्षा में ही फेल हो गया। घटना को 21 दिन बीत चुके हैं और विभाग का  15 दिनों का अल्टीमेटम पूरी तरह खोखला साबित हुआ है।

शुरुआती जांच में जहां सिर्फ एक ज्वाइंट के पास धंसने की बात सामने आई थी। वहीं अब तकनीकी खामियों को देखते हुए तीन अलग-अलग ज्वाइंट्स के पास पुल को तोड़ा गया है।

चालू होने में दो माह का लगेगा समय

इसके साथ ही एक और बात सामने आ रही है कि पुल के बीच की सड़कों में भी अब नई दरारें पड़नी शुरू हो गई हैं, जो इसके स्ट्रक्चर पर सवालिया निशान खड़ा करती हैं।

मौके पर पुनर्निर्माण कार्य में जुटे तकनीकी कर्मियों और मजदूरों ने बताया कि पुल को पूरी तरह चालू होने में अभी लंबा वक्त लगेगा।

वर्तमान स्थिति और प्रक्रिया को देखा जाए, तो वर्तमान में तीनों प्रभावित ज्वाइंट्स को कंक्रीट कटर से तोड़ने और मलबे को साफ करने का काम चल रहा है।

आरओबी बंद रहने से लोगों को हो रही समस्‍या

तोड़ने और नया सरिया बांधने के बाद दोबारा ढलाई का कार्य शुरू होगा। ढलाई होने के बाद कंक्रीट को पूरी मजबूती हासिल करने यानी पकने में अकेले 21 दिन का समय अनिवार्य रूप से लगेगा।

पकने के बाद ही पिचिंग और लोड टेस्टिंग का काम हो सकेगा। इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम दो माह का समय लगना तय है। इस आरओबी का मुख्य हिस्सा स्वयं रेलवे ने एक साल पहले ही तैयार कर लिया था।

लेकिन राज्य सरकार की एजेंसी ने संपर्क पथ बनाने में भारी सुस्ती दिखाई। अब जब पुल बना भी तो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। इस लेटलतीफी और लापरवाही का खामियाजा बक्सर की जनता भुगत रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *