कैसे हुई घटना?
हादसे के बाद घायलों को ले गए अस्पताल
कोल्हान और पूर्वी सिंहभूम में ही क्यों गिरती है ज्यादा बिजली?
कोल्हान प्रमंडल (पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां) देश के उन क्षेत्रों में शामिल है जहां वज्रपात की घटनाएं सर्वाधिक होती हैं। इसके पीछे मुख्य भौगोलिक और वैज्ञानिक कारण निम्नलिखित हैं:
- लौह अयस्क और खनिज भंडार: विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र की मिट्टी और पहाड़ों में लौह अयस्क (Iron Ore) और अन्य धात्विक खनिजों की प्रचुरता है। ये खनिज विद्युत के सुचालक होते हैं, जो बादलों के बीच उत्पन्न होने वाले विद्युत आवेश (Charge) को अपनी ओर तेजी से आकर्षित करते हैं।
- छोटा नागपुर पठार की स्थिति: कोल्हान का पठारी इलाका और घने जंगल बादलों के घर्षण के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा करते हैं।
- जलवायु परिवर्तन: बढ़ती गर्मी और नमी (Humidity) के कारण स्थानीय स्तर पर ‘थंडर क्लाउड्स’ का निर्माण अधिक होता है।
पांच वर्षों का डराने वाला आंकड़ा
आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले पांच वर्षों में कोल्हान प्रमंडल में ठनका गिरने से 250 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। अकेले पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला जिले में हर साल मानसून और प्री मानसून के दौरान 40 से 50 मौतें दर्ज की जाती हैं। इनमें अधिकांश घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में खुले मैदान या पेड़ों के नीचे शरण लेने के कारण होती हैं।


