कस्बा क्षेत्र के गांव कमालपुर निवासी राहुल ने पहली बार वर्जिन पीक पर पहुंच तिरंगा फहराते हुए न केवल अपने गांव और क्षेत्र, बल्कि जिले का नाम रोशन किया है। भारतीय सेना में कार्यरत राहुल वर्तमान में नेशनल इंस्टीट्यूट आफ माउंटेनियरिंग एंड एडवेंचर स्पोर्ट्स (एनआइएमएएस) में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने 11 सदस्यीय टीम के साथ छह दिन के कठिन अभियान को सफलतापूर्वक पूरा कर इस दुर्गम चोटी को पहली बार फतह किया।
राहुल कुमार ने बताया कि 27 जून 2026 को अरुणाचल प्रदेश के जसवंतगढ़ से अभियान की शुरुआत हुई थी। टीम का नेतृत्व मेजर उर्मिल तराले दत्ता ने किया। अभियान को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। भारतीय सेना ने इसे आपरेशन अरुणोदय नाम दिया। टीम का लक्ष्य 8,583 फीट ऊंची एक ऐसी वर्जिन पीक तक पहुंचना था, जहां आज तक कोई पर्वतारोही नहीं पहुंच सका था। कई वर्षों में इस चोटी को फतह करने के प्रयास हुए, लेकिन दुर्घटनाओं और कठिन परिस्थितियों के कारण सभी अभियान अधूरे रह गए।
इस बार आठ सेना अधिकारियों और एनआइएमएएस के तीन प्रशिक्षकों सहित 11 सदस्यीय दल ने तीन जुलाई की सुबह आठ बजे पहली बार इस चोटी पर पहुंचकर तिरंगा फहराया और इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि के बाद चोटी का नाम बजरंग पीक रखा।
राहुल कुमार ने बताया कि अभियान के दौरान टीम को लगातार बदलते मौसम, भारी बर्फबारी, पिघलते ग्लेशियर और सीधी खड़ी चट्टानों जैसी कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर ढलान इतनी अधिक थी कि घंटों तक टेंट लगाने के लिए सुरक्षित जगह भी नहीं मिल सकी। तेज बर्फबारी ने मुश्किलें और बढ़ा दीं। उन्होंने बताया कि कई बार हालात ऐसे बने कि मौत सामने खड़ी नजर आई, लेकिन टीम ने धैर्य और साहस नहीं खोया। मेजर उर्मिल कराले दत्त के प्रभावी नेतृत्व, टीम भावना और सभी सदस्यों के अनुभव व सूझबूझ के बल पर अभियान लगातार आगे बढ़ता रहा। आखिरकार तीन जुलाई की सुबह टीम ने वर्जिन पीक पर पहुंचकर तिरंगा फहराया।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

