NCL निगाही खादान क्षेत्र में बड़ा हादसा टला! ब्लास्टिंग की चपेट में आई करोड़ों की ड्रिल मशीन, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल?

सिंगरौली। एनसीएल की निगाही परियोजना एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। शनिवार दोपहर परियोजना के वेस्ट सेक्शन क्षेत्र में ब्लास्टिंग के दौरान एक ड्रिल मशीन विस्फोट की चपेट में आ गई, जिससे मशीन का पिछला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। गनीमत रही कि घटना के समय कोई श्रमिक मशीन के आसपास मौजूद नहीं था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार दोपहर निगाही परियोजना के वेस्ट सेक्शन एरिया में नियमित खनन कार्य के तहत ब्लास्टिंग की जा रही थी। इसी दौरान ब्लास्टिंग क्षेत्र के नजदीक खड़ी एक ड्रिल मशीन विस्फोट के प्रभाव में आ गई। तेज धमाके और उड़ते पत्थरों की चपेट में आने से मशीन का पिछला हिस्सा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया।

बड़ा हादसा टला, लेकिन कई सवाल छोड़ गई घटना

घटना में किसी कर्मचारी के घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन इस दुर्घटना ने परियोजना प्रबंधन, खान प्रबंधक, सुरक्षा अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खनन विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी ब्लास्टिंग से पहले सुरक्षा मानकों के तहत पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया जाता है तथा मशीनों और कर्मचारियों को सुरक्षित दूरी पर हटाया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर ब्लास्टिंग क्षेत्र में मौजूद इतनी बड़ी ड्रिल मशीन जिम्मेदार अधिकारियों को दिखाई क्यों नहीं दी? और यदि मशीन की जानकारी थी तो उसे समय रहते सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं हटाया गया?

सुरक्षा मानकों के पालन पर उठे सवाल

जानकारों का कहना है कि खदान क्षेत्र में ब्लास्टिंग एक अत्यंत संवेदनशील प्रक्रिया होती है, जिसमें छोटी सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में ड्रिल मशीन का ब्लास्टिंग की चपेट में आ जाना सुरक्षा मानकों के पालन पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है। घटना के बाद कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि मशीन की जगह कोई कर्मचारी मौजूद होता तो स्थिति कितनी भयावह हो सकती थी।

पहले भी होती रही हैं दुर्घटनाएं

सूत्रों की मानें तो निगाही परियोजना में छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। आरोप है कि परियोजना क्षेत्र में समय-समय पर कई घटनाएं घटित होती रहती हैं, लेकिन अधिकांश मामलों को आंतरिक स्तर पर ही सीमित कर दिया जाता है और वे सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ पाते। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद आवश्यक सुधार देखने को नहीं मिले हैं।

जांच और जवाबदेही

घटना के बाद अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में इससे भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

फिलहाल परियोजना प्रबंधन की ओर से इस घटना को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एनसीएल प्रबंधन इस मामले की जांच कराता है या इसे भी अन्य घटनाओं की तरह सामान्य घटना मानकर भुला दिया जाता है।

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