रिहन्द बांध का जलस्तर एक सप्ताह में दो फीट बढ़ा, बढ़ोत्तरी की रफ्तार औसतन धीमी

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 देश के विशालतम जलाशयों में शामिल रिहन्द बांध के जलस्तर में अगस्त के पहले सप्ताह के दौरान दो फीट की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि मानसून के इस दौर में जलस्तर बढ़ने की रफ्तार पिछले वर्षों की तुलना में काफी धीमी बनी हुई है।

यदि आगामी दिनों में कैचमेंट एरिया में अच्छी वर्षा नहीं हुई और जलस्तर अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंचा, तो इसका असर वर्ष भर रिहन्द बांध पर आधारित जल विद्युत इकाइयों के उत्पादन पर पड़ सकता है। साथ ही बांध के पानी पर निर्भर तापीय बिजलीघरों के संचालन पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।

आंकड़ों के अनुसार एक अगस्त की सुबह रिहन्द बांध का जलस्तर 845.7 फीट दर्ज किया गया था, जो सात अगस्त की सुबह बढ़कर 847.7 फीट हो गया। यानी एक सप्ताह में कुल दो फीट की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि सामान्य वर्षों में अगस्त के पहले सप्ताह तक जलस्तर में इससे अधिक वृद्धि देखने को मिलती रही है, जिससे जल विद्युत उत्पादन और तापीय परियोजनाओं के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो जाता है।

रिहन्द बांध प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। बांध पर संचालित जल विद्युत इकाइयों से अपेक्षाकृत कम लागत पर बिजली का उत्पादन किया जाता है। बिजली की मांग बढ़ने, विशेषकर पीक आवर के दौरान बिजली प्रबंधन आवश्यकता के अनुसार इन इकाइयों से तत्काल उत्पादन बढ़ाकर ग्रिड को स्थिर रखने का प्रयास करता है।

इससे महंगे स्रोतों से बिजली खरीदने की आवश्यकता भी कम हो जाती है। इतना ही नहीं क्षेत्र की कई तापीय विद्युत परियोजनाएं भी कूलिंग और अन्य तकनीकी आवश्यकताओं के लिए रिहन्द बांध के पानी पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि जलस्तर सामान्य से कम रहता है तो भविष्य में जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

इससे बिजली उत्पादन की रणनीति पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहेगी। जानकारों का कहना है कि अगस्त और सितंबर मानसून के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण महीने हैं। यदि इन दोनों महीनों में अच्छी बारिश होती है और रिहन्द बांध के कैचमेंट एरिया में पर्याप्त पानी पहुंचता है, तभी जलस्तर में तेजी से सुधार संभव है।

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