श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) के आसपास संचालित अवैध और मानकविहीन निजी नर्सिंग होमों के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है।
स्वास्थ्य विभाग और अग्निशमन विभाग के नियमों की अनदेखी कर संचालित किए जा रहे 20 से अधिक निजी नर्सिंग होमों को छापेमारी के दौरान सील कर दिया गया। कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
तीन संयुक्त टीमों ने एक साथ की छापेमारी
यह विशेष अभियान पूर्वी अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) तुषार कुमार के नेतृत्व में चलाया गया। कार्रवाई के लिए तीन संयुक्त टीमों का गठन किया गया था, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ छापेमारी की।
टीम में औराई, गायघाट और मीनापुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी, संबंधित प्रखंडों के स्वास्थ्य पदाधिकारी, अग्निशमन विभाग की टीम तथा अहियापुर थाना पुलिस शामिल रही। भारी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
स्वास्थ्य और फायर सेफ्टी मानकों में खामियां
प्रशासनिक जांच के दौरान कई नर्सिंग होम स्वास्थ्य विभाग के निर्धारित मानकों और फायर सेफ्टी नियमों का पालन करते नहीं पाए गए। कुछ संस्थानों के पास आवश्यक अनुमतियां और लाइसेंस संबंधी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं थे।
इन्हीं अनियमितताओं के आधार पर कार्रवाई करते हुए संबंधित संस्थानों को सील किया गया।
मरीजों को सुरक्षित स्थानांतरित करना चुनौती
नर्सिंग होमों को बंद करने से पहले वहां भर्ती मरीजों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रहा। कई गंभीर मरीज इलाजरत थे, जिन्हें तत्काल दूसरे अस्पतालों में स्थानांतरित करना पड़ा।
प्रशासनिक अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों ने मरीजों को एंबुलेंस और अन्य साधनों से सुरक्षित रूप से एसकेएमसीएच पहुंचाया, ताकि उनके उपचार में किसी प्रकार की बाधा न आए।
कार्रवाई से मेडिकल रोड क्षेत्र में अफरा-तफरी
अचानक हुई छापेमारी के दौरान एसकेएमसीएच के मेडिकल रोड और आसपास के क्षेत्रों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कार्रवाई की सूचना मिलते ही कुछ नर्सिंग होम संचालक अपने प्रतिष्ठान छोड़कर निकल गए।
इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और मरीजों के परिजन भी मौके पर जुट गए और प्रशासनिक कार्रवाई को देखते रहे।
अवैध संस्थानों पर जारी रहेगा अभियान
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की सुरक्षा से समझौता करने वाले और नियमों का उल्लंघन कर संचालित हो रहे किसी भी स्वास्थ्य केंद्र को बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, जिले में ऐसे संस्थानों की पहचान कर आगे भी जांच और कार्रवाई का अभियान जारी रहेगा।


