पंजाब सरकार की ओर से निजी स्कूलों की वार्षिक फीस वृद्धि को पांच प्रतिशत तक सीमित करने और पिछले तीन वर्षों में निर्धारित सीमा से अधिक वसूली गई फीस लौटाने के आदेश का निजी स्कूल संगठनों ने विरोध किया है। स्कूल संचालकों ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने और सभी पक्षों के साथ बातचीत कर समाधान निकालने की मांग की है।
मंगलवार को नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस (निसा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा और रिकाग्नाइज्ड एफिलिएटेड स्कूल्स एसोसिएशन (रासा) पंजाब के चेयरमैन हरपाल सिंह यूके ने कहा कि सरकार का यह फैसला निजी स्कूलों की आर्थिक व्यवस्था पर प्रतिकूल असर डालेगा।
उनका कहना था कि शिक्षा क्षेत्र लगातार बढ़ती महंगाई, कर्मचारियों के वेतन, बिजली, परिवहन और अन्य संचालन खर्चों का सामना कर रहा है। ऐसे में फीस वृद्धि पर पांच प्रतिशत की सीमा तय करना व्यावहारिक नहीं है। स्कूल प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि सरकार पिछले तीन वर्षों में ली गई अतिरिक्त फीस लौटाने का प्रावधान लागू करती है तो कई स्कूल गंभीर वित्तीय संकट में आ सकते हैं। इससे शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के वेतन भुगतान के साथ-साथ विद्यार्थियों को दी जाने वाली सुविधाओं पर भी असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि निजी स्कूल शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और लाखों विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं। ऐसे में कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी संबंधित पक्षों से विस्तृत चर्चा की जानी चाहिए। उनका कहना था कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में एकतरफा फैसलों के बजाय आपसी सहमति से नीति बनाई जानी चाहिए।
निसा और रासा के पदाधिकारियों ने सरकार से मांग की कि फीस संबंधी आदेश पर पुनर्विचार किया जाए और निजी स्कूल संगठनों के साथ जल्द बैठक आयोजित की जाए। उन्होंने भरोसा जताया कि बातचीत के माध्यम से ऐसा समाधान निकाला जा सकता है, जिससे अभिभावकों के हित भी सुरक्षित रहें और निजी स्कूलों का संचालन भी प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि संगठन सरकार के साथ सकारात्मक संवाद के लिए तैयार हैं और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में सहयोग देना चाहते हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

