अमरनाथ यात्रा और कश्मीर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर अब कोई भी अवांछित तत्व आतंकी या उसके सहयोगी के रूप में घुसपैठ नहीं कर पाएगा। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इसके लिए क्यूआर कोड आधारित मोबाइल ऐप ‘पहचान’ विकसित किया है, जो सेवा प्रदाताओं की मौके पर ही पहचान और सत्यापन करेगा।
पुलिस प्रशासन के अनुसार, अब घाटी के सभी पर्यटन स्थलों पर रेहड़ी-पटरी वाले, घोड़े-पालकी संचालक, टूरिस्ट गाइड समेत सभी सेवा प्रदाताओं के लिए क्यूआर कोड आधारित पहचान पत्र अनिवार्य होगा। बिना इस पहचान पत्र के कोई भी व्यक्ति सेवा क्षेत्र में काम नहीं कर सकेगा। यदि कोई बिना सत्यापन के पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी और उसे क्षेत्र से बाहर कर दिया जाएगा।
कैसे काम करेगा ‘पहचान’ ऐप?
- तत्काल सत्यापन: ऐप के जरिए मौके पर ही सेवा प्रदाता का डिजिटल रिकॉर्ड चेक किया जा सकेगा।
- पंजीकृत vs अपंजीकृत: इससे पंजीकृत-सत्यापित और गैर-पंजीकृत व्यक्तियों के बीच स्पष्ट अंतर रहेगा।
- पारदर्शिता बढ़ेगी: अधिकृत सेवा प्रदाताओं का डिजिटल रिकॉर्ड बनने से यात्रियों को दी जाने वाली सेवाओं में जवाबदेही तय होगी।
- भीड़ प्रबंधन: संगठित व्यवस्था से यात्रा मार्गों पर विवाद, ओवरचार्जिंग और अनावश्यक भीड़भाड़ कम होगी।
अमरनाथ यात्रा पर विशेष फोकस
जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस ऐप को लॉन्च करने का मुख्य उद्देश्य 3 जुलाई से शुरू हो रही श्री अमरनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करना है। इस वर्ष यात्रा 3 जुलाई से 28 अगस्त 2026 तक चलेगी।
अधिकारी ने कहा, “पर्यटन स्थलों और धर्मस्थलों पर भीड़ ज्यादा होती है। क्यूआर कोड वाले पहचान पत्र सिर्फ सक्षम प्राधिकारियों द्वारा जारी किए जाएंगे, इसलिए इनकी नकल संभव नहीं है। कोई भी असामाजिक तत्व या आतंकी इनका दुरुपयोग कर क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर पाएगा।”
श्रद्धालुओं का बढ़ेगा भरोसा
पुलिस का मानना है कि इस पहल से श्रद्धालुओं और पर्यटकों का भरोसा बढ़ेगा, क्योंकि वे केवल सत्यापित सेवा प्रदाताओं से ही संपर्क में आएंगे। साथ ही असली सेवा प्रदाताओं को डिजिटल पहचान और औपचारिक मान्यता मिलने से उनके काम को मजबूती मिलेगी।
प्रशासन ने यात्रा को सुरक्षित, सुचारु और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। ‘पहचान ऐप’ को इसी दिशा में एक अहम तकनीकी कदम माना जा रहा है।


