क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो तेज धूप से घर लौटकर होने वाले सिरदर्द या थकान को सिर्फ ‘मौसम का असर’ मानकर नजरअंदाज कर देते हैं? ‘अरे, इतनी तेज धूप है, थोड़ी थकान तो होगी ही!’ -अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो जरा ठहरिए।
हीटवेव के दौरान शायद आप भी अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां करते होंगे, जो आज नहीं तो कल सेहत को नुकसान की ओर धकेलने का काम करेंगी। हमारी सबसे बड़ी भूल यह है कि हम अपने शरीर से जुड़े कुछ संकेतों को तब तक अनदेखा करते रहते हैं, जब तक कि पानी सिर के ऊपर न चला जाए यानी समस्या बहुत ज्यादा गंभीर न हो जाए।
आम लगने वाले ये लक्षण हैं खतरे की घंटी
डॉ. मयंका लोढ़ा सेठ का कहना है कि सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, चक्कर आना, दिल की धड़कन का तेज होना और लगातार थकान महसूस होना कोई आम “गर्मियों की उलझन” नहीं है। ये परेशानियां दरअसल डिहाइड्रेशन, इलेक्ट्रोलाइट्स के असंतुलन और आपके हार्ट पर पड़ रहे दबाव के शुरुआती संकेत होते हैं।
प्यास लगने का इंतजार करना है नुकसानदायक
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि हम इन लक्षणों को बहुत सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि हमें प्यास का अहसास तब होना शुरू होता है, जब हमारे शरीर का 1 से 2 प्रतिशत पानी पहले ही खत्म हो चुका होता है। इसका सीधा-सा मतलब यह है कि जब तक हमें प्यास लगती है, तब तक हमारा शरीर पानी की कमी का शिकार हो चुका होता है।
अत्यधिक गर्मी के दौरान किए गए क्लिनिकल ऑब्जरवेशन भी यही बताते हैं कि अनियमित रूप से पानी पीने की आदतें गर्मी से होने वाली गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी बढ़ा देती हैं।
खराब आदतें जो बढ़ाती हैं शरीर की कमजोरी
हीटवेव हमारे शरीर की पहले से मौजूद कमजोरियों को और भी ज्यादा बढ़ा देती है। इनमें पोषण की कमी, नींद पूरी न होना, तनाव और मेटाबॉलिक असंतुलन शामिल हैं।
लोग अक्सर तेज गर्मी में भी इन खराब आदतों को जारी रखते हैं:
- जरूरत से ज्यादा कैफीन का सेवन करना।
- ज्यादा चीनी वाले पेय पदार्थ पीना।
- समय पर खाना न खाना।
- पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना।
हम अक्सर यह सोचकर इन बातों को टाल देते हैं कि यह थकान सिर्फ ‘मौसम की वजह से’ है, लेकिन बार-बार थकान महसूस होना, दिमाग काम न करना या मांसपेशियों में कमजोरी आना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि शरीर भारी दबाव से गुजर रहा है।
लक्षणों को मामूली समझने की भूल
इस पूरी स्थिति में सबसे बड़ी चिंता हमारे व्यवहार को लेकर है। लोग अपने अंदर इन लक्षणों को देखते और महसूस करते हैं, लेकिन इन्हें बहुत मामूली मानकर टाल देते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ऐसा तो हर गर्मी में होता है।
डॉक्टर के अनुसार, किसी भी बीमारी से बचाव की शुरुआत बहुत पहले ही हो जानी चाहिए। हमें यह समझना होगा कि जब तक गर्मी का तनाव या इसके लक्षण गंभीर रूप से दिखाई देने लगते हैं, शरीर उससे बहुत पहले ही अंदरूनी तौर पर संघर्ष करना शुरू कर चुका होता है। इसलिए, शरीर के शुरुआती संकेतों को पहचानें और समय रहते जरूरी कदम उठाएं।


