एमजीबी का गिरता ग्राफ: एक नजर इतिहास पर
टाटा स्टील में वेतन समझौतों के इतिहास पर नजर डालें तो एमजीबी में लगातार गिरावट दर्ज की गई है, जिसे अब कंपनी प्रबंधन एक परंपरा मानकर चल रहा है:
- 1997 से 2006 (10 वर्ष): एनजीसीएस (NGCS) के तहत कर्मचारियों को 20 प्रतिशत एमजीबी मिला था।
- 2007 से 2012 (5 वर्ष): पूर्व यूनियन अध्यक्ष रघुनाथ पांडेय के कार्यकाल में यह बढ़कर 21 प्रतिशत हुआ।
- 2012 से 2018 (6 वर्ष): पूर्व अध्यक्ष पीएन सिंह ने कर्मचारियों को 18.25 प्रतिशत एमजीबी दिलाया।
- 2019 से 2024 (7 वर्ष): निवर्तमान अध्यक्ष आर. रवि प्रसाद के कार्यकाल में सबसे बड़ा झटका लगा और एमजीबी गिरकर महज 12.75 प्रतिशत रह गया। यानी सीधे 5.5% की गिरावट आई।
डीए फ्रीज होने से ओल्ड ग्रेड कर्मचारियों को दोहरा नुकसान
इतिहास में पहली बार: अलग-अलग होगा सैलरी फैक्टर
इस विसंगति का असर यह होगा कि टाटा स्टील के इतिहास में पहली बार ओल्ड सीरीज ग्रेड के कर्मचारियों का सैलरी फैक्टर एक समान न होकर अलग-अलग होगा। यह फैक्टर अधिकतम 1.62 से लेकर घटते क्रम में 1.30 तक जा सकता है।
हायर पेंशन स्कीम पर भी सीधा असर: जिन कर्मचारियों ने बेहतर भविष्य के लिए ‘हायर पेंशन स्कीम’ (Higher Pension Scheme) का विकल्प चुना है, उन्हें इस बेसिक वेतन के नुकसान का खामियाजा जीवनभर भुगतना पड़ेगा। बेसिक कम होने से उनकी अंतिम पेंशन राशि भी सीधे तौर पर प्रभावित होगी।


