गाजियाबाद औद्योगिक क्षेत्रों में अवैध किराएदारी पर यूपीसीडा का शिकंजा, 55 इकाइयों को नोटिस

यूपीसीडा (उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण) के औद्योगिक क्षेत्रों में अवैध किराएदारी के खेल पर शासन ने सख्ती शुरू कर दी है। हाल ही में इन्वेस्ट यूपी की टीम ने यूपीसीडा के साथ संयुक्त सर्वे अभियान में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयों में किराएदारी पकड़ी।

आवंटितों को नोटिस जारी करने के साथ ही साहिबाबाद क्षेत्र में एक भूखंड़ का आवंटन निरस्त किया गया। यह वही भूखंड है, जिसमें हाल ही में बायलर फटने से दो कामगारों की जान चली गई थी।

इन्वेस्ट यूपी टीम के सर्वे के बाद अब चिह्नित भूखंडों को जब्त और निरस्त करने की कार्रवाई आरंभ हो गई है। इसी कड़ी में साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र में यूपीसीडा ने एक बड़े औद्योगिक भूखंड का आवंटन निरस्त किया गया है। इस भूखंड में गत दिनों बायलर ब्लास्ट में दो कामगारों की जान चली गई थी।

इसके बाद किराएदारी पर चल रही इकाइयों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। यूपीसीडा की ओर से ऐसी 55 इकाइयों को नोटिस जारी किए गए हैं। इसके बाद अब इनके आवंटन निरस्त करने की बारी है। इस कार्रवाई को लेकर किराएदारी पर चल रही इकाई संचालकों के साथ ही आवंटितों की भी नींद उड़ी है।

हादसे ने खोली थी पोल, सुरक्षा मानक भी थे गायब

साहिबाबाद के जिस भूखंड पर यह कार्रवाई शुरू हुई है, वहां चल रही अवैध फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की जा रही थी। पूर्व में हुए बॉयलर विस्फोट में दो श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई थी और कई गंभीर रूप से घायल हुए थे। जांच में पाया गया कि आवंटन की शर्तों को ताक पर रखकर यह भूखंड किराए पर दिया गया था और वहां बिना किसी वैध लाइसेंस या सुरक्षा जांच के खतरनाक काम हो रहा था। हादसे के बाद से ही प्रशासन और यूपीसीडा पर कार्रवाई का भारी दबाव था।

फरवरी में शुरू हुआ था इन्वेस्ट यूपी का सर्वे

शासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि औद्योगिक भूखंडों को खुद इस्तेमाल करने के बजाय ऊंचे दामों पर किराए पर देकर मुनाफा कमाया जा रहा है। इसके बाद इन्वेस्ट यूपी की विशेष टीम ने फरवरी माह में गाजियाबाद, साहिबाबाद, लोनी और ट्रानिका सिटी का सर्वे किया, जिसमें ऐसी दर्जनों इकाइयां चिह्नित की गईं जो नियमों के विपरीत अवैध किराएदारी पर चल रही थीं। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर यूपीसीडा ने पहले सभी संबंधित आवंटियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। संतोषजनक जवाब न मिलने और लापरवाही सिद्ध होने पर निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।

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