देवरिया में चखनी घाट पुल की तकनीकी खामी दूर करेंगे BHU विशेषज्ञ, सेतु निगम ने शुरू की प्रक्रिया

उत्तर प्रदेश और बिहार को जोड़ने वाले चखनी घाट पर निर्माणाधीन पुल के एक पाये में सामने आई तकनीकी खामी को दूर करने के लिए अब काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी के विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। सेतु निगम के अधिकारी तकनीकी जांच और सुधारात्मक कार्य की प्रक्रिया में जुट गए हैं।

सेतु निगम गोरखपुर के परियोजना प्रबंधक अरुण कुमार ने गुरुवार को निर्माणाधीन पुल का निरीक्षण कर कार्य की स्थिति का जायजा लिया। वहीं मुख्य विकास अधिकारी राजेश कुमार सिंह भी मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से तकनीकी समस्या तथा उसके समाधान को लेकर विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

चखनी घाट पर वर्तमान में लोगों की आवाजाही का प्रमुख साधन लकड़ी का अस्थायी पुल है। बरसात और बाढ़ के दौरान यह मार्ग काफी जोखिमपूर्ण हो जाता है। क्षेत्रीय जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग और भाटपाररानी विधायक सभाकुंवर कुशवाहा के प्रयासों के बाद प्रदेश सरकार ने यहां स्थायी पुल निर्माण को मंजूरी दी थी। परियोजना के लिए शासन ने 16 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।

निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा था, लेकिन पुल के एक पाये एवं उससे जुड़े स्लैब में तकनीकी खामी सामने आने के बाद निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे। इसके बाद विभागीय स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है।सेतु निगम के उप परियोजना प्रबंधक विजेंद्र सिंह ने बताया कि पुल के एक पाये में तकनीकी समस्या चिन्हित हुई है। इसकी जांच कराई जा चुकी है और अब समाधान के लिए बीएचयू के विशेषज्ञों से परामर्श लिया जाएगा। विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक सुधारात्मक कार्य कराकर निर्माण को निर्धारित मानकों के अनुरूप आगे बढ़ाया जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा और गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा तथा विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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