गोरखपुर विश्वविद्यालय ने बढ़ाईं पाठ्यक्रमों की सीटें, कॉलेजों की बढ़ी परेशानी

 विभिन्न पाठ्यक्रमों में 30 प्रतिशत सीटें बढ़ाने के दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्णय ने शहर और आसपास के कालेजों की चिंता बढ़ा दी है। हर वर्ष सीटें भरने के लिए जूझने वाले वित्तपोषित व स्व-वित्तपोषित कालेज प्रबंधन को अब आशंका है कि विश्वविद्यालय परिसर में बढ़ी सीटों के कारण उनके यहां प्रवेश प्रभावित हो सकता है। खासतौर पर स्ववित्तपोषित संस्थानों के सामने कालेज संचालन की राह में आर्थिक संकट का रोड़ा आ सकता है। कालेज प्रबंधन विश्वविद्यालय के इस निर्णय काे चुनौती मान रहे हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने नए शैक्षणिक सत्र के लिए स्नातक और परास्नातक स्तर पर सीटों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। बीए आनर्स में नियमित सीटों के साथ 731 स्ववित्तपोषित सीटें जोड़कर कुल संख्या 3169 कर दी गई है। वहीं बीएससी गणित में 60, जीव विज्ञान में 30, गृह विज्ञान में 10 तथा बीए जेएमसी में 20 सीटें बढ़ाई गई हैं। इसके तहत पारंपरिक पाठ्यक्रमों के साथ तकनीकी और रोजगारपरक कोर्सों में भी स्ववित्तपोषित सीटों का विस्तार किया गया है।

परास्नातक स्तर पर भी विश्वविद्यालय ने बड़ा विस्तार किया है। पीजी पाठ्यक्रमों में कुल सीटों की संख्या अब 5003 तक पहुंच गई है। इनमें 2791 नियमित और 1624 स्ववित्तपोषित सीटें शामिल हैं। एमए अर्थशास्त्र, अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान, हिंदी, इतिहास, प्राचीन इतिहास, संस्कृत और समाजशास्त्र जैसे प्रमुख विषयों में तो 180 से 188 तक सीटें निर्धारित की गई हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि सीटें बढ़ाने के फैसले से छात्रों को अधिक अवसर मिलेंगे, लेकिन संबद्ध कालेजों की चिंता बढ़ गई है।

कालेजों के प्रबंधन का मानना है कि विश्वविद्यालय परिसर में अधिक सीटें होने से छात्र सीधे बड़े परिसर का रुख करेंगे, जिससे निजी और वित्तपोषित कालेजों में प्रवेश घट सकता है। स्ववित्तपोषित प्रबंधक महासभा ने इसे कालेजों के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति बताया है।

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